करोड़ों का कारोबार पर सुविधाओं की दरकार

मीनाक्षी भारद्वाज 

जसूर, । व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कस्बा जसूर उपमंडल नूरपुर का मुख्य केंद्र बिंदु है। साथ ही प्रदेश का प्रवेश द्वार होने के कारण सैकड़ों लोग गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस सेवा के लिए जसूर आते हैं। साथ ही यहां रोजाना करोड़ों का कारोबार होता है, लेकिन कस्बे के मुख्य बस स्टॉप पर वर्षाशालिका न होने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा जसूर में अभी तक मुख्य तौर पर कोई भी बस स्टैंड नहीं है। हाल ही में सरकार ने जसूर के समीप जाच्छ स्थित हिमाचल पथ परिवहन निगम की कर्मशाला में बस स्टैंड बनाने की योजना प्रस्तावित की है।

साथ ही पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन के तहत लाने की कवायद भी चल रही है, लेकिन ये योजनाएं कब साकार रूप लेंगी, यह भविष्य की बात है। कस्बे में दो प्रमुख बस स्टॉप हैं और यहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग बसों का इंतजार करते हैं। आलम यह है कि तपती धूप हो या आसमान से बादल बरस रहे हों, यदि किसी यात्री ने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस का इंतजार करना है तो उसेबैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में यात्रियों को फुटपाथ पर बैठकर या खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता है। जसूर में हैं दो बस स्टॉप जसूर में दो बस स्टॉप हैं। एक मुख्य चौक में है और इसे धमेटा चौक के नाम से जाना जाता है।

इस बस स्टॉप से रोजाना लोग धमेटा, राजा का तालाब, तलवाड़ा, चंडीगढ़, दिल्ली, जवाली, गंगथ, इंदौरा, कांगड़ा, धर्मशाला, पठानकोट, चंबा व भरमौर के लिए बसों का इंतजार करते हैं। दूसरा बस स्टॉप डाकघर के समीप है और यहां से भी लोग पठानकोट, लोधवां, राजा का बा़ग, नागाबाड़ी, बरंडा, रिट, कंडवाल, डमटाल, खन्नी, बदूही व परगना के लिए बसों के इंतजार के लिए पहुंचते हैं। जिला चंबा के साथ सटा होने के कारण इस क्षेत्र के लोग भी यहीं से गुजरते हैं। रेन शेल्टर न होने से बच्चों व महिलाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 2015 में एनएच विस्तारीकरण के कारण वर्षाशालिका निर्माण की भेंट चढ़ गई थी।

मुख्य चौक पर रोजाना हजारों यात्री बसों का इंतजार करते हैं, लेकिन रेन रेल्टर न होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दोनों स्थानों पर जल्द से जल्द वर्षाशालिका बनाई जानी चाहिए। -तिलक राज शर्मा।