पहले चरण में नक्सल प्रभावित बस्तर में टूटा पोलिंग का रिकॉर्ड

नीलू सोनी 

रायपुर। छत्तीसगढ़ का नक्सल प्रभावित बस्तर संसदीय क्षेत्र में लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए हर वर्ष सुरक्षाबल से लेकर आम लोग तक बड़ी संख्या बलिदान देते हैं। इन परिस्थितियों में वहां चुनाव किसी जंग से कम नहीं है। वह भी तब जब चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद से नक्सल लगातार वोट न देने के लिए लोगों को धमकी दे रहे थे। इन सब के बीच मतदान के ठीक दो दिन पहले दंतेवाड़ा विधायक भीमा मंडावी की नक्सलियों ने हत्या कर दी। इसके बावजूद वहां के वोटरों ने रिकार्ड मतदान कर पूरे देश को संदेश दिया।

बस्तर में इस बार रिकार्ड 65 फीसद से अधिक वोट पड़े हैं। बस्तर के संसदीय इतिहास में यह अब तक का सबसे ज्यादा मतदान है। इस संसदीय सीट में शामिल सभी आठों विधानसभा सीटें नक्सल प्रभावित हैं। आश्चर्यजनक स्र्प से सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शामिल सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा में पिछली बार की तुलना में इस बार 17 फीसद से अधिक मतदान हुआ है।दंतेवाड़ा में पिछले आम चुनाव में करीब 47 फीसद मतदान हुआ था, इस बार आंकड़ा सीधे 57 फीसद तक पहुंच गया है। यह स्थिति तब है, जब मतदान से दो दिन पहले नक्सलियों ने क्षेत्रीय विधायक भीमा मंडावी की हत्या कर दी थी। विधानसभा चुनाव में यहां करीब 61 फीसद मतदान हुआ था।

प्रत्याशियों के क्षेत्र 11 फीसद बढ़ा आंकड़ा

बस्तर संसदीय सीट से कांग्रेस ने चित्रकोट विधानसभा सीट से विधायक दीपक बैज को टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने इसी सीट से विधायक रहे दीपक बैज को चुनाव मैदान में उतारा है। संभवत: इसी वजह से यहां पिछले आम चुनाव की तुलना में करीब 11 फीसद अधिक मतदान हुआ है। 2014 के लोकसभा चुनाव में चित्रकोट में 66.15 फीसद मतदान हुआ था। इस बार आंकड़ा 77.20 फीसद तक पहुंच गया है।