जलियांवाला बाग पर हरसिमरत व कैप्टन में ट्वीट वार

चंडीगढ़: जलियावाला कांड को लेकर केंद्रीय फूड प्रोसैसिंग मंत्री हरसिमरत कौर बादल तथा पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह में ट्विटर वार छिड़ गई है। हरसिमरत ने ट्वीट कर कहा कि महाराजा को अपने बुजुर्गों द्वारा सिखों के खिलाफ उस समय के पापों का जवाब देना पड़ेगा, जब वह अहमद शाह अब्दाली के साथ मिल गए थे।  इसके अलावा कैप्टन के बुजुर्ग गोरों के साथ मिलकर महाराजा रणजीत सिंह के खिलाफ हो गए थे और 100 वर्ष पहले जलियांवाला बाग में सैंकड़ों निर्दोष पंजाबियों का खून बहाया गया था तो उन्होंने सरकारी टैलीग्राम के जरिए अमृतसर के जनरल डायर को बधाई भेजी थी।

हरसिमरत ने कहा कि अब आपके भागने के लिए कोई जगह नहीं बची है। आपको अब सिख कौम को बताना चाहिए कि आपने अपने बुजुर्गों के पापों के लिए माफी क्यों नहीं मांगी। मैं अपने ट्वीट में आपके दादा महाराज भुपिन्द्र सिंह द्वारा लिखे टैलीग्राम का सबूत दे चुकी हूं, जिसमें वह कह रहे हैं कि आपके (जनरल डायर) द्वारा की कार्रवाई (गोलीबारी) सही है। गवर्नर जनरल भी इसके साथ सहमत हैं।

हरसिमरत ने कहा कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार के. नटवर सिंह द्वारा लिखी एक किताब में इस बात का ‘रिकार्ड किया सबूत’ है कि महाराजा भुपिन्द्र सिंह ने जनरल डायर द्वारा की गई अमानवीय कार्रवाई की हिमायत की थी। हरसिमरत कौर बादल ने यह ट्वीट कै. अमरेन्द्र सिंह के पिछली रात कांग्रेस प्रधान राहुल गांधी के साथ अकाल तख्त में जाने के संबंध में किया था। हरसिमरत ने अपने ट्वीट में कहा कि मुख्यमंत्री  राहुल गांधी को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब में गए, परंतु जिनकी दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सिखों के उच्च धार्मिक संस्थान की टैंकों और तोपों से तोड़-फोड़ करवाई थी।

कैप्टन का हरसिमरत को जबाव

वहीं केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की टिप्पणी के विरुद्ध तीखा हमला करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने कहा कि आप के परदादा ने जलियांवाला बाग के घृणित खूनी नरसंहार वाले दिन जनरल डायर को शाही भोज दिया था।  हमुख्यमंत्री ने इसको भ्रष्ट टिप्पणी बताया और हरसिमरत के ट्वीट के मुकाबले में लिखा, ‘क्या तूने, तुम्हारे पति एस.एस. बादल या उसके पिता प्रकाश सिंह बादल ने कभी तुम्हारे परदादा सरदार सुंदर सिंह मजीठिया द्वारा जलियांवाला बाग के नरसंहार वाले दिन जनरल डायर को शाही भोज दिए जाने के लिए माफी मांगी है? उसे बाद में उसकी वफादारी और उसकी भूमिका के लिए 1926 में सम्मानित किया गया।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी न केवल दोगली और भ्रामक है।