अवैध बजरी खनन से टोंक में बनास पेटे के जल स्रोत सूखे

टोंक

गणेश योगी 

जिले में लोकसभा चुनाव में बनास की बजरी भी मुद्दा बनी हुई है। बनास की बजरी के अवैध खनन के लिए कांग्रेस व भाजपा एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते भी नजर आ रहे हैं। लेकिन चुनावी मुद्दा बनी बजरी ने जिले में पेयजल संकट को बढा दिया है और बजरी का अवैध खनन कोई भी करवा रहा हो। किंतु इसका खामियाजा आमजन को ही भुगतना पड़ रहा है। बनास नदी में बजरी खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। उसके बाद भी बजरी खनन हो रहा है। इस पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई भी की जा रही है। लेकिन उसके बाद भी बजरी खनन नहीं रुक रहा है। सरकारी एवं निजी सभी निर्माण कार्य के लिए बजरी खनन बखूबी हो रहा है।

बजरी के अवैध खनन पर प्रशासन भी अनभिज्ञ नहीं है। लेकिन कार्रवाई नाममात्र की ही नजर आ रही है। कई लोग तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि बनास से वर्तमान में भी बजरी के करीब एक हजार से अधिक ट्रक जा रहे हैं। बहरहाल मामला कुछ भी रहा हो। लेकिन बजरी ने शहर में पानी सप्लाई के सभी स्रोतों को नष्ट कर दिया है।

कभी 82 कुएं थे, अब सभी तोड़ रहे हैं दम

जिले में बनास नदी की बजरी कई रास्तों से निकाली जा रही है। इसके कारण कभी शहर में पानी सप्लाई के लिए बनास नदी में 82 से अधिक कुएं एवं जल स्त्रोत थे। जिससे शहर में करीब 110 लाख लीटर पानी सप्लाई किया जाता था। लेकिन अब हाल ये है कि जलदाय विभाग के बनास के जल स्रोतों से मात्र 10 लाख लीटर पानी ही मिल पा रहा है। बाकी पानी की आपूर्ति बीसलपुर बांध से आने वाले पानी से ही की जा रही है।

पानी की किल्लत बढ़ी :

बजरी के अवैध खनन से नष्ट हुए जल स्त्रोत के कारण शहर बीसलपुर बांध पर ही निर्भर होकर रह गया है। गत मानसून सत्र में बारिश कम होने के कारण 200 लाख लीटर पानी मिलने की बजाए शहर को बीसलपुर से मात्र 110 लाख लीटर पानी ही बा मुश्किल वर्तमान में मिल पा रहा है।

इसके कारण, काली पलटन, धन्नातलाई, रजबन, ताल कटोरा, पुरानी टोंक के कई क्षेत्रों सहित शहर के बाहरी क्षेत्रों में पानी की किल्लत बढ़ गई है।