राजगढ़ जिला अस्पताल की जांचों में गड़बड़ी, उधर बिना नब्ज देखे खिलचीपुर में बच्चे को भेजा मर्चुरी में

राहुल जैन 

राजगढ़ बरुखेड़ी निवासी 8 साल के रोहित पुत्र हेमराज नट कुएं में गिर गया। परिजन बालक को कुएं से निकालकर खिलचीपुर के सामुदायिक अस्पताल ले गए। बालक के परिजनाें का अाराेप है कि अस्पताल में डॉक्टर एनके वर्मा ने बालक की नब्ज देखे बगैर उसे दूर से देखकर ही मरने की पुष्ट कर दी। उन्हाेंंने बालक काे बिना देखे ही पीएम रूम में रखवा भी दिया। इसे लेकर मृत बालक के परिजनों डॉक्टर के खिलाफ आक्रोश जताते हुए हंगामा कर दिया।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में चल रही भागवत कथा के समापन के बाद शुक्रवार दोपहर तीन बजे रोहित अपने घर से बकरियां चराने जंगल गया था। देर शाम तक वह घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने रोहित की तलाश शुरू की, जिसे सड़क किनारे चारण के खेत में बने कुएं के निकाला। ग्रामीणों ने डायल 100 को सूचना देर बालक को अस्पताल लेकर गए। जहां डाक्टर के व्यवहार से परिजन खासे नाराज हुए। डॉ वर्मा ने बताया कि जब बालक घंटों पानी में पड़ा रहा तो, उसकी क्या नब्ज देखें। परिजनों ने स्वयं कहा था कि उसकी मौत हो गई है। इसलिए मैंने बालक के शव को बगैर नब्ज देखे पीएम रूप भिजवा दिया था। वहीं बीएमओ डॉ आरके पुष्पक ने बताया कि दुर्घटनाओं में अस्पताल लाए गए घायलों को परीक्षण के बाद ही मृत घोषित किया जाता है। डाक्टर द्वारा बच्चे का परीक्षण किया गया हैं या नही। इसकी मै खुद जानकारी लेता हूं। इसके बाद ही कुछ कह पाउंगा।

अन्य अस्पताल में नहीं है जांच की सुविधा : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खिलचीपुर, जीरापुर के साथ ही जिले के 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्राें में सीबीसी, बीएमपी, विडाल, यूरिन टेस्ट की जांच सुविधा नहीं है। लैब जरूर बनी है।जांच में पीलिया के मरीज का बिलीरुबिन बताया सामान्य, था 20.42 एमजी

जिला अस्पताल में जिलेभर से मरीज बेहतर इलाज के लिए आते हैं, लेकिन अस्पताल में आए दिन मरीजों की पैथालॉजी अाैर रेडियोलॉजी की जांचाें में गड़बड़ी हाेने से उपचार प्रभावित होता है। कई बार तो मरीजों की जान पर बन आती है।

शनिवार को जिला अस्पताल में पीलिया के गंभीर मरीज को जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वस्थ मानकर डिस्चार्ज किया जा रहा था, लेकिन डॉक्टर ने मरीज के लक्षण देख दोबारा जांच कराई। दूसरी जांच रिपोर्ट में पीलिया की पुष्टि हुई अाैर मरीज का इलाज दोबारा शुरू किया गया। यह एेसा इकलौता मामला नहीं है। पैथालॉजी, रेडियोलॉजी विभाग में किसी मरीज की रिपोर्ट किसी दूसरे मरीज को दे दी जाती है। नाम, लिंग आदि में तक गलत जानकारी भर दी जाती हैं। स्थिति यह है कि जांच कराने के बाद करीब 30 प्रतिशत लोग जिला अस्पताल से जांच रिपोर्ट लेने ही नहीं आते। इससे निजी पैथालॉजी लैब का कारोबार बढ़ रहा है।

सिविल सर्जन बोले- यह गंभीर लापरवाही की श्रेणी में, हम क्रॉसचेक कराकर दोषी के खिलाफ करेंगे कार्रवाई

जिला अस्पताल में जांच में ऐसी-ऐसी लापरवाही