अब केजरीवाल के पाले में गठबंधन की गेंद

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच चले रहे गठबंधन की बात को आगे बढ़ाने और अंतिम निर्णय के लिए आप मुखिया व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने सांसद संजय सिंह को कांग्रेस से बात करने के लिए अधिकृत किया है। केजरीवाल ने यह फैसला उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और संजय सिंह से मीटिंग के बाद सुनाया। संजय सिंह पहले से ही गठबंधन को लेकर कांगे्रस से बात तो रहे थे लेकिन, वह पूरी तरह से कोई निर्णय ले सकने की स्थिति में नहीं थे और न तो इसके लिए वे अधिकृत थे। इसके साथ ही कांग्रेस ने गठबंधन की गेंद अब केजरीवाल के पाले में फेंक दी है। कांग्रेस की मानें तो अब निर्णय आप मुखिया को लेना है। कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी ने अपनी स्थिति साफ कर दी है।

इस बाबत वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, इस संबंध में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस 4-3 के फार्मूले पर गठबंधन को तैयार है। कहा, कांग्रेस ने गठबंधन पर सहमति जताते हुए अपना बड़ा दिल दिखाया है। रणदीप ने केजरीवाल पर लुका-छिपी का खेल खेलने का आरोप लगाया और कहा कि राहुल गांधी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब फैसला आम आदमी पार्टी को लेना है। सुरजेवाला ने पिछले सप्ताह ही कहा था कि आप से गठबंधन सिर्फ दिल्ली में हो सकता है अन्य राज्यों में नहीं। दरअसल आम आदमी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस से गठबंधन दिल्ली के अलावा हरियाणा और चंड़ीगढ़ में भी होना चाहिए। बता दें, 12 मई को होने वाले मतदान के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसी स्थिति में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन का पेंच फंसा हुआ है।

केवल दिल्ली में गठबंधन के लिए दो से अधिक सीटें नहीं देेगी आप
आम आदमी पार्टी केवल दिल्ली में गठबंधन करने के लिए दो से अधिक सीटें नहीं देगी। पार्टी ने कहा कि वह कांग्रेस के साथ आगे चर्चा करने के लिए तैयार है और इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त किया है। आप सूत्रों ने कहा कि अगर कांग्रेस केवल दिल्ली में गठबंधन चाहती है तो उसे 5:2 के अनुपात में होना चाहिए और यदि गठबंधन को दिल्ली और हरियाणा दोनों के लिए किया जाता है तो राष्ट्रीय राजधानी में अनुपात 4:3 और 6:3 हो सकता है। गोपाल राय ने कहा कि इस बैठक में यह तय किया गया कि हम कांग्रेस को समझाएंगे कि दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ की 18 सीटों पर एक साथ चुनाव लडऩा भाजपा के लिए निश्चित नुकसान होगा।