बालविवाह रोकने के लिए बालिकाओं को किया जागरूक

गणेश योगी 

टोंक।समाज और परिवार का विरोध कर खूद का बाल विवाह रुकवाने से लेकर दूसरी बालिकाओं को इस अभिशाप से बचाने के लिए गांव की किशोरियां आगे आ रही हैं। सोहेला की रामघनी, प्रियंका, कोमल और पिंकी उन्हीं बहादुर लड़कियों में से हैं। जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए पीपलू तहसील के 32 गावों में सेव द चिल्ड्रन और शिव शिक्षा समिति की ओर से 10 से 19 साल की करीब 3 हजार किशोरियों के साथ शादी बच्चों का खेल नहींञ्ज परियोजना चलाई जा रही हैं। परियोजना के साथ डिस्कशन लीडर के रूप में काम करते हुए रा मघनी बैरवा में एक जबरदस्त बदलाव आया हैं। उसने चाइल्ड लाइन को फोन कर पुलिस की मदद से गांव में दो लड़कों का बाल विवाह को रुकवाया हैं। साथ ही विशेष जरूरतों वाले बच्चों के प्रशिक्षण में सहायता भी कर रही हैं। सेव द चिल्ड्रन संस्था से जुड़ी जसविंदर कौर ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मोर देन ब्राइड एलियांस के तहत बाल विवाह की रोकथाम के लिए बालिकाओं के अंतर्गत शादी बच्चों का खेल नही परियोजना में बेहतर व स्वस्थ जीवन और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उन्हें जीवन कौल शिक्षा, यौन व प्रजनन स्वास्थ्य अधिकार की जानकारी, टोंक जिला राजस्थान के उन 13 जिलों में शुमार हैं जहां अभी भी 40 प्रतिशत से अधिक बच्चियां का विवाह कानूनी उम्र से पहले हो जाता हैं। बाल विवाह रोकथाम के लिए रामघनी, प्रियंका, कोमल और पिंकी जैसी बालिकाओं के हौसलों के दम पर जिले में बाल विवाह रोकथाम के सरकारी आंकड़ों में बढ़ोत्तरी हुई हैं।