उज्जैन में है विश्व की एकमात्र ब्राह्मण स्वरूप वाली अनूठी हनुमान प्रतिमा

उज्जैन. विश्व की एकमात्र ब्राह्मण स्वरूप वाली हनुमान प्रतिमा शहर के कार्तिक चौक में विराजमान है। 1980 के सिंहस्थ में जब प्रतिमा ने चोला छोड़ा तो प्रतिमा का यह स्वरूप सामने आया। हनुमान मानव रूप में हाथ जोड़े खड़े हैं। उनके शरीर पर जनेऊ है। दाड़ी मूछ है। कार्तिक चौक में गली में स्थित आवासीय परिसर में बूढ़े राम का एक हजार साल पुराना मंदिर है। पुराविदों के अनुसार प्रतिमाएं परमार कालीन हैं। इस स्वरुप के दर्शन पुजारी ओमप्रकाश निर्वाणी के अनुसार इस तरह की प्रतिमा अब तक कहीं और नजर नहीं आईं।

यह है प्रतिमा के स्वरूप की कथा :
यह प्रतिमा हनुमानजी के उस प्रसंग से जुड़ी है, जब उनकी पहली मुलाकात श्रीराम से हुई थी। बाली से युद्ध के बाद सुग्रीव भाग कर किष्किंधा में रह रहे थे। तभी श्रीराम भी सीता की खोज करते हुए वहां पहुंचे। सुग्रीव को आशंका हुई कि कहीं बाली ने तो गुप्तचर नहीं भेजे। उन्होंने हनुमान को परीक्षा लेने भेजा। हनुमान ब्राह्मण बन कर श्रीराम के पास गए और उनके दास हो गए।
नीलगंगा में है अंजनी का आश्रम :
नीलगंगा सरोवर को हनुमानजी की माता अंजनी देवी का आश्रम भी माना जाता है। जूना अखाड़ा द्वारा सरोवर के किनारे जून में गंगा दशहरे पर अपने भवन के लोकार्पण के साथ अंजनी माता और हनुमानजी की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।