‘चायवाला’ एक बार फिर आजमाएगा किस्मत, ग्वालियर से ठोकी ताल

ग्वालियर: प्रदेश में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीति गरमाई हुई है। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है। मुकाबला और रोचक होता जा रहा है। इस चुनावी घमासान में जहां एक ओर टिकट पाने के लिए नेता बागी हो रहे हैं, तो वहीं चुनाव में एक और रंग देखने को मिल रहा है। जहां एक चाय वाले आनंद सिंह कुशवाहा भी इस चुनावी दंगल में कूद पड़ा है और उसने कलेक्ट्रेट में नामांकन दाखिल किया है। आनंद अभी तक 20 से ज्यादा चुनाव लड़ चुके हैं और अब वे ग्वालियर लोकसभा का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। वह कलेक्ट्रेट में अपनी पत्नी के साथ नामांकन करने आए थे।

शहर के एक मोहल्ले में चाय की छोटी सी दुकान चलाने वाले आनंद सिंह कुशवाहा पिछले कई दशकों से चुनाव लड़ रहे हैं। ये बात अलग है कि वे आज तक कोई चुनाव नहीं जीते लेकिन उनका जुनून कम नहीं हुआ है। वे मानते है कि जब एक चाय वाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो मैं सांसद क्यों नहीं बन सकता।

गौरतलब है कि आनंद अभी तक राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सांसद, विधायक और पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं। आनंद सिंह का कहना है कि वह लोगों की सेवा करना चाहते हैं। इसलिए हर बार चुनाव लड़ने के लिए मैदान में आते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी नकली चाय वाला है, असली चाय वाला तो वह हैं।

दूसरों को चाय पिलाकर अपने परिवार का पालन करने वाले आनंद की राजनीति में गहरी दिलचस्पी है और वह ग्राहकों से चाय की चुस्की के बीच देश और राजनीति के मुद्दों पर चर्चा करते हैं। वह बताते हैं कि उन्हें जनता का समर्थन मिलता है। शायद चाय और चुनाव का स्वाद एक जैसा होता है। यही कारण है कि लोगों को यदि इन दोनों की आदत लग जाए, तो वह आसानी से नहीं छूटती।

आनंद के अनुसार एक बार पार्षद के चुनाव में उनके समाज के नेता और मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के बीच तकरार हो गई थी । तब नारायण सिंह कुशवाह और आनंनद सिंह कुशवाह ने एक ही वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ा था, बकौल आनंद सिंह कुशवाह उम्मीदवारी को लेकर नारायण सिंह कुशवाह ने उनसे ऐसा कुछ कह दिया जिसके बाद से उन्होंने देश में होने वाले सभी चुनाव लड़ने की ठान ली। उनका कहना है कि जब तक सांस है तब तक चुनाव लड़ता रहूंगा । उन्हें भरोसा है कि कभी तो ईश्वर उनकी भी सुनेगा।

चुनाव जीतकर उनका सपना साकार होता है या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल आंनद का चुनावी जंग में आना लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।