सरकारी विभाग से असंतुष्ट जनता

 

–राजेन्द्र भगत–
आए दिन सरकारी विभागों के कार्यालयों के बाहर जनता के प्रदर्शन हाथापाई और बड़े-बड़े जमावड़े साबित करते हैं कि विभाग अपने कार्यों को सही ढंग से नहीं कर पा रहे हर वर्ष सरकारें बड़े बड़े बजट सरकारी कामों में तेजी लाने के लिए बनाती हैं जनता के टैक्स से बनने वाले बजट क्या जनता की सुविधाओं पर लगते हैं? अगर लगते हैं तो फिर जनता को वह सुविधाएं क्यों नहीं मिलती जिसके लिए उनकी जेब के पैसे को बजट द्वारा विभागों को आवंटित किया जाता है? कुर्सी पर बैठा सरकारी कर्मचारी जनता पर धौंस क्यों जमाता है जो उसी के पैसे से सैलरी पाता है
दुनिया की बड़ी शक्ति बन रहे भारत को अपने विभागों में सुधार करने की आवश्यकता है सरकारी कर्मचारियों की आय, उनका कार्य, जनता के सामने जवाब देह क्यों नहीं होना चाहिए?
जनता सबसे अधिक प्रताड़ित बिजली पानी राशन से जुड़े विभागों से होती है ऐसा नहीं है कि सभी कर्मचारी अपना काम सही नहीं करते, पर अगर किसी कर्मचारी के विरुद्ध शिकायत विभाग के पास आती है तो उस पर कार्यवाही क्यों नहीं होती अगर कोई कर्मठ उच्च अधिकारी कार्रवाई करता भी है तो उस पर भ्रष्ट टीम दबाव बनाकर पूरे विवाद को ईमानदार के विरुद्ध कर दबाव बनाती है कई ऐसे इमानदार कर्मठ अधिकारियों के किस्से जनता के सामने है कई ईमानदार लोग अपने तबादलों से दुखी है जो भ्रष्ट टीम का हिस्सा बनते हैं वह मजे करते हैं और जो ईमानदार अधिकारी हैं वह अपने साथियों से ही परेशान है यह केवल किसी एक विभाग का हाल नहीं बल्कि लगभग हर विभाग ऐसे केसों से भरा पड़ा है

जम्मू कश्मीर में स्टेट सब्जेक्ट बनाने से लेकर जमीन के काम यातायात बिजली-पानी इत्यादि कई विभागों में कामकाज को लेकर शिकायतें आती है प्रदर्शन होते हैं हाथापाई और कोर्ट कचहरी तक मामले जाते हैं पर कई कई वर्षों तक जनता की शिकायतें जस की तस बनी रहती है क्यों भ्रष्ट कर्मचारियों पर कार्रवाई तुरंत नहीं होती क्यों विभाग कर्मचारियों के काम को लेकर लगने वाली शिकायतों का निपटारा तुरंत नहीं कर देता? जम्मू कश्मीर जहां आतंकवाद का बोलबाला है भ्रष्टाचार अलगाववाद तथा सरकार के विरुद्ध विरोध करने वालों की संख्या रही है ऐसे राज्य में जनता की शिकायतों को तुरंत हल करने की आवश्यकता है