राहुल गांधी की नागरिकता पर उठे सवाल, चुनाव आयोग पहुंची भाजपा

नई दिल्ली: राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक शिकायत का हवाला देते हुए भाजपा ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष की नागरिकता और शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए और उनसे इस मामले पर सफाई देने को कहा। अमेठी सीट से गांधी की उम्मीदवारी के खिलाफ निर्वाचन अधिकारी को दी गई एक शिकायत पर भाजपा की यह प्रतिक्रिया सामने आई है। शिकायत में उनकी नागरिकता और योग्यता को लेकर आरोप लगाते हुए आपत्ति की गई थी।

निर्वाचन अधिकारी ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख सोमवार को तय की है। भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने बताया कि यह “चौंकाने” वाला है कि गांधी के वकील ने इन आपत्तियों पर जवाब देने के लिए वक्त मांगा है। उन्होंने कहा, “यह गंभीर आरोप हैं। राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं या नही? क्या वह कभी ब्रिटिश नागरिक बने थे? उन्हें वास्तविक कहानी के साथ सामने आना चाहिए।” कांग्रेस की तरफ से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने कहा कि ऐसे मामलों में निर्वाचन अधिकारी अंतिम प्राधिकार है, लेकिन वह चुनावी हलफनामे में जो लिखा है उसकी प्रमाणिकता की जांच नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, “अगर कोई आपत्ति उठाते हुए निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करता है तो उन्हें प्रभावित पक्ष को जरूर सुनना चाहिए। अगर किसी को भी हलफनामे में दी गई जानकारी पर कोई भी आपत्ति है तो उस व्यक्ति को अदालत से संपर्क करना चाहिए। चुनावी हलफनामे को लेकर की गई किसी आपत्ति में निर्वाचन आयोग की कोई भूमिका नहीं होती है।” राव ने दावा किया कि एक ब्रिटिश कंपनी ने अधिकारियों के समक्ष अपने प्रतिवेदन में गांधी को एक ब्रिटिश नागरिक बताया। राहुल गांधी ने 2004 में कहा था कि उन्होंने इस कंपनी में निवेश किया था।

शिकायत का हवाला देते हुए, भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि 2004 से 2014 के दौरान विभिन्न चुनावों में गांधी द्वारा दिए गए हलफनामे में “विसंगतियां हैं और तथ्यों को दबाने का प्रयास किया गया”। राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि कैंब्रिज विश्वविद्यालय से विकास अर्थशास्त्र में एम. फिल किया था लेकिन बाद में दावा किया कि यह विकास अध्ययन में था।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जांच में यह पता चलता है कि उस वर्ष एक राहुल विंसी को डिग्री मिली थी न कि राहुल गांधी को। राव ने कहा, “हम यह जानना चाहेंगे कि क्या राहुल गांधी विभिन्न देशों में कई नामों से जाने जाते हैं।” उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि क्या गांधी की योग्यता भी कांग्रेस के घोषणा-पत्र की तरह है जो हर पांच साल पर बदल जाती है।