डीआरएम ने फाटक चालू कराने दिए थे निर्देश, अधिकारियों ने नहीं किया अमल

सागर।

शिरीष सिलकारी 

रेलवे के 23 नंबर फाटक के बंद होने के बाद से मोतीनगर थाना क्षेत्र में ट्रेन की टक्कर व ट्रेन की चपेट में आने से लोगों की मृत्यु का ग्रॉफ बढ़ रहा है, लेकिन रेलवे अधिकारियों को इस बात की कोई चिंता ही नहीं है। यही कारण है कि डीआरएम के निर्देश के बाद भी इस फाटक को नहीं खोला गया और गुरुवार को एक ओर युवक ट्रेन की चपेट में आने से काल के गाल में समा गया।

मोतीनगर थाने से राहतगढ़ फाटक पर हुए हादसे की संख्या मांगी तो उन्होंने बताया कि फाटक बंद होने के बाद औसतन 4 लोगों की मृत्यु ट्रेन से कटने व टक्कर से हुई है। मोतीनगर एएसआई श्री मरावी के अनुसार इस माह में अब तक 3 लोगों की मौत हुई है। वही फाटक खुलने के दौरान यह ग्रॉफ औसतन 1 का था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार राहतगढ़ बस स्टैंड के पास पड़ने वाला 23 नंबर फाटक जीआरपी में नहीं बल्कि मोतीनगर थाना क्षेत्र में आता है। इसलिए स्टेशन से भेजे जाने वाले मेमो या घटना की जानकारी के बाद पुलिस घटना स्थल पर पहुंच जाती है।

अब तक तीन लोगों की मौत

रेलवे के 23 नंबर फाटक पर ट्रेन से घटने वाली घटनाओं की जानकारी जब डीआरएम डॉ. मनोज सिंह को दी गई तो उन्होंने इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों को राहतगढ़ फाटक को खोलने के निर्देश दिए थे। साथ ही फाटक न खोले जाने की स्थिति में वहां वैक्लिपक व्यवस्था बनाने की बात कही गई थी, लेकिन अधिकारियों द्वारा इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इससे एक और अज्ञात युवक की मौत हो गई। स्थानीय निवासियों का मानना है कि अन्य फाटकों की तरह इस फाटक को भी खोला जा सकता है। नए फाटक लगने के बाद अब तो एक बटन के दबाते ही फाटक खुल व बंद हो सकता है, तो अधिकारियों को इस विषय में निर्णय लेना चाहिए।

हटा दिए थे स्लीपर

डीआरएम के आदेश पर इंजीनियरिंग विभाग द्वारा फाटक को खोलने को लेकर तैयारी कर ली गई थी। फाटक के बीच में रखे स्लीपर को भी हटा दिया गया, फिर भी अधिकारियों ने इस फाटक को चालू नहीं किया। इससे 1 अप्रैल को 28 वर्षीय युवक, 3 अप्रैल को 58 वर्षीय व 16 अप्रैल एक अज्ञात युवक की मृत्यु हो है। बताया जाता है कि यदि इस फाटक को खोला जाता होता तो इस प्रकार की घटनाएं घटित नहीं होती।