कायमगंज-पेड़ की छांव में स्कूल, छाया के साथ खिसकते हैं बच्चे

कायमगंज

प्रदीप कुमार 

हम कंप्यूटर क्रांति के दौर में हैं, लेकिन आज भी उत्तर प्रदेश शिक्षा व परिषदीय स्कूलों में होने वाली व्यवस्थाओं के मामले में काफी पीछे है। फर्रुखाबाद के नगर के मोहल्ला पृथ्वी दरवाजा स्थित प्राथमिक स्कूल को देखकर चिराग तले अंधेरा वाली कहावत बिलकुल सटीक बैठती है। यहा न भवन है, न बेंच व डेस्क। जाड़ा, गर्मी हो या बरसात हर मौसम में शीशम के पेड़ के नीचे ही क्लास लगती है। अगर बरसात आती है तो बच्चे भागो-भागो का शोर मचाने लगते हैं। विद्यालय में 55 बच्चे पंजीकृत हैं। अभिभावक इस ललक में बच्चों को पढ़ने भेज देते हैं, कि कम से कम दोपहर का भोजन तो मिल जाएगा।

सर्व शिक्षा अभियान के तहत बेसिक शिक्षा पर करोड़ों रुपये प्रति वर्ष खर्च होते हैं। ताकि बच्चों को अच्छी तालीम और व्यवस्थाएं मुहैया कराई जा सके। मजे की बात यह है कि फर्रुखाबाद के मोहल्ला पृथ्वी दरवाजा में प्राथमिक स्कूल पेड़ की छांव में कई वर्षो से संचालित हो रहा है। इस विद्यालय में 55 बच्चे पंजीकृत हैं और स्टाप भी तैनात हैं, लेकिन नहीं हैं तो बस विभागीय व्यवस्थाएं। ऐसा नहीं है कि अफसरों को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने उक्त विद्यालय की कायाकल्प करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए और न ही बच्चों के भविष्य के बारे में सोचा। यहां पंजीकृत बच्चों को गर्मी और बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। जैसे-तैसे सूरज की तपन बढ़ती है, वैसे-वैसे धूप से बचने के लिए बच्चे छांव की तरफ खिसकते नजर आते हैं। विद्यालय में सिर्फ कोठरी नुमा छोटा सा कमरा

किराए के भवन में चलने वाले इस स्कूल में टिन शेड का एक छोटा सा बरामदा व एक कोठरी नुमा छोटा सा कमरा जिसमें प्रधानाध्यापक कक्ष है। इसमें विभागीय रजिस्टर व मिडडे मील, बर्तन आदि रखे जाते हैं। धूप में प्यासे रहते हैं बच्चे

इस स्कूल में हैंडपंप नहीं होने से बच्चे पूरा-पूरा दिन प्यासे रहते हैं। जबकि गर्मी के दिनों में पानी पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए। विद्यालय में न ही बिजली है और न ही शौचालय। लघुशंका के लिए बच्चों को इधर उधर या घर जाना पड़ता हैं। वहीं स्टाप भी भी दिक्कत होती है। शिक्षक का दर्द..

विद्यालय में शिक्षक राशिद अली खान ने बताया किराए भवन में कई वर्षों से स्कूल चल रहा है। गर्मी के दिनों में टिन शेड का बरामदा बहुत गरम रहता है। बच्चों को छोटे बरामदे एक साथ नहीं बैठाया जा सकता, इसलिए बच्चों को पेड़ के नीचे बैठाना पड़ता है। बरसात के समय परेशानी बढ़ जाती है। तेज बारिश होने पर छुट्टी करनी पड़ती है।