छत्तीसगढ़ / फिजूल योजनाओं में करोड़ों खर्च; बायोडीजल बना नहीं होटल-मोटल खाली और साइकिल ट्रैक पर खड़े हैं ठेले

रायपुर . प्रदेश के विकास के दावों के साथ लॉन्च की गई कई योजनाएं अब फिजूल खर्च का पर्याय बनकर रह गई हैं। बायोडीजल के नाम पर पिछली सरकार ने 6 साल में 1200 करोड़ खर्च किए और होटल-मोटल के लिए 250 करोड़ की योजना फ्लॉप साबित हुईं। ज्यादातर जगहों पर ये खंडहर हो चुकी हैं। सबसे बड़ी फिजूलखर्ची रतनजोत से बायोडीजल बनाने की योजना रही। आलम ये है कि बाड़ियों से तेल तो निकला नहीं, इसके बीज खाकर बच्चे बीमार जरूर हो जाते हैं।

इसके आलावा स्कायवॉक, पवनचक्की, स्वीपिंग मशीन, साइकिल ट्रैक, इन्क्यूबेशन सेंटर और अन्य कई योजनाएं सरकारी खजाने पर भारी पड़ीं। बड़ी बात ये है कि इन्हें लॉन्च करने से पहले यह देखा ही नहीं गया कि ये कितनी व्यावहारिक हैं या सफल हो पाएंगी भी या नहीं। जानिए इन योजनाओं की आज क्या है स्थिति…

ये सभी योजनाएं शुरू हुईं विकास के दावों के साथ लेकिन मुकाम तक नहीं पहुंचीं
बायोडीजल| डीजल नहीं अब खाड़ी से, डीजल मिलेगा बाड़ी से : 2005 में रतनजोत योजना शुरू हुई। नया रायपुर के सुंदरकेरा में 105 एकड़ जमीन पर प्लांटेशन हुआ। एक-एक कर प्रदेश में लगभग 1.65 लाख हेक्टेयर जमीन पर 50 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए गए। 2015 तक बायोडीजल में आत्मनिर्भर होना था। इंडियन ऑयल, रिलायंस पेट्रोलियम और विदेशी कंपनी डी-वन को न्यौता दिया गया। रतनजोत लगाने 45 हजार हेक्टेयर जमीन क्रेडा-एचपीसीएल बायोफ्यूल लिमिटेड और इंडियन ऑयल क्रेडा बायोफ्यूल लिमिटेड को लीज पर दी गई। बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण पर 8 माह में 14 करोड़ खर्च हो गए, यानी 1 लीटर तेल पर 54,585 रुपए। 2010 में सरकार को समझ में आया योजना फ्लॉप हो गई तो पौधरोपण सूची से रतनजोत को हटा दिया गया।

करोड़ों की स्वीपिंग मशीनें कबाड़, अब आएंगी रोड डॉक्टर मशीन : नगरीय प्रशासन विभाग ने करीब 30 करोड़ रुपए खर्च कर स्वीपिंग मशीनें खरीदी थीं। इनमें से 4 रायपुर और 2 बिलासपुर को दी गईं। लेकिन अब सभी मशीनें कबाड़ हो चुकी हैं। अब रोड की गुणवत्ता जांचने के लिए रोड डॉक्टर मशीनें खरीदी जाएंगी।

स्काईवाक| 50 करोड़ में आधा-अधूरा ढांचा बना राजधानी रायपुर के बीचो-बीच बन रहे स्काईवाक की उपयोगिता पर ही सवाल है। 75 करोड़ की लागत वाली इस योजना पर 50 करोड़ रुपए खर्च हो चुके, अब इसका काम रोक दिया गया है।

ई-मंडी|30 करोड़ खर्च, दुकानें जर्जर तुलसी बाराडेरा में लगभग दस साल पहले 30 करोड़ रुपए खर्च कर सब्जी पहली ई-मंडी बनाने का दावा किया गया। शिफ्टिंग आज तक नहीं की जा सकी। यहां बनी दुकानें जर्जर हो चुकीं।

36 आईएनसी|चिप्स ने फूंके 15 करोड़, स्टार्टअप शून्य  : स्टार्टअप छत्तीसगढ़ के तहत चिप्स ने इन्क्यूबेशन सेंटर बनाया। प्रोजेक्ट की लागत 15 करोड़ रुपए थी