गिरफ्तार ISI एजेंट, मां की बातों को भी करता था अनसुना

अमृतसर  श्रीनगर में छह राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात सेना के जवान मलकीयत सिंह की मां मंजीत कौर को जब पता चला कि बेटा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को देश की खुफिया जानकारी बेच रहा है तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। दोपहर तक गांव महावा के लोगों को भी मलकीयत की करतूत पता चल चुकी थी। लोग मलकीयत की मां को ताने देते हुए पूछ रहे थे कि ऐसा कब हो गया। इस पर मां बोली, मैंने तो बेटे को देश की सेवा के लिए भेजा था। पता नहीं वह मुई (मरजानी) एजेंसी के हत्थे कब चढ़ गया। जो देश में बम धमाके करवाती है, हेरोइन और हथियारों की तस्करी भी करवाती है।

मंजीत कौर ने बताया कि आठ साल पहले मलकीयत के पिता बलदेव सिंह की अचानक मौत हो गई। इसके एक साल बाद मलकीयत सेना में भर्ती हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। बेटे की सरकारी नौकरी लगी तो उसे गर्व होने लगा कि मलकीयत भारतीय सीमा पर तैनात होकर भारत माता की सेवा कर रहा है। पिछले तीन महीने में वह तीन बार छुट्टी लेकर घर आया।

एक महीना पहले मलकीयत की पत्नी हरभिंदर कौर भी झगड़ा कर डेढ़ साल के बेटे नवतेज सिंह के साथ मायके चली गई। अब घर में अकेली बेटे की राह देखती थी। मलकीयत 15 दिन पहले घर आया था। वह बेटे को कहती थी कि बहू को घर ले आए, लेकिन वह ज्यादातर अपने मोबाइल पर ही व्यस्त रहता था।

पड़ोसियों ने बताया कि मलकीयत मोबाइल पर इतना व्यस्त रहता था कि वह मां की आवाज भी अनसुनी कर देता था। मां कई बार चीखती-चिल्लाती, लेकिन वह फिर भी मोबाइल में व्यस्त रहता। किसी को पता नहीं था कि वह चंद पैसों के लालच में आकर देश की खुफिया जानकारियों का सौदा कर रहा था।

बचपन में गाता था देशभक्ति के गीत

मंजीत कौर ने बताया कि मलकीयत बचपन से ही देशभक्ति के गीत गाया करता था। पिता बलदेव सिंह उसे देश पर कुर्बान होने वाले वीरों की कहानियां सुनाया करते थे। पता नहीं मलकीयत कैसे देश के लिए खतरनाक मंसूबे पालने लग गया। मंजीत कौर ने खुद को कोसते हुए कहा कि पता नहीं उससे क्या गलती हो गई है। वाहेगुरु ही भला कर सकते हैं।