ITC के चेयरमैन रहे वाईसी देवेश्वर का 72 साल की उम्र में निधन

 इंडियन टुबैको कंपनी लिमिटेड (आईटीसी) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ वाईसी देवेश्वर का शनिवार को 72 साल की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से कई गंभीर बिमारियों से जूझ रहे थे। आईटीसी ने उनके निधन की पुष्टि की है। देवेश्वर दो दशक से ज्यादा आईटीसी प्रमुख रहे।

लाहौर में हुआ था जन्म
देवेश्वर का जन्म 4 फरवरी 1947 को लाहौर में हुआ था। उन्होंने दिल्ली आईआईटी और उसके बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। 1996 में आईटीसी के सीईओ और चेयरमैन पद के लिए नियुक्त किए गए थे और तब से वह देश में सबसे लंबे समय तक सीईओ रहने वाले व्यक्ति हैं। आईटीसी लिमिटेड, ऐसा नाम जिससे भारत की तकरीबन पूरी आबादी जुड़ी हुई है। हम यहां शेयरधारकों की नहीं, बल्कि कस्टमर्स की बात कर रहे हैं, जो आईटीसी के प्रोडक्ट इस्तेमाल करते हैं। फूड, पर्सनल केयर, ब्रांडेड अपैरल, सिगरेट, होटल, एग्री-बिजनेस या आईटी कोई भी नाम लीजिए, आईटीसी हर क्षेत्र में मौजूदगी रखती है। 24 अगस्त 1910 में तंबाकू कंपनी के रूप में शुरू हुई कंपनी आज देश की सबसे बड़ी डायवर्सिफाइड कंपनी है।

बुरे वक्त में शामिल हुए थे देवेश्वर
योगेश चंद्र देवेश्वर ऐसे समय शामिल हुए थे जब कंपनी की आर्थिक हालात काफी खराब थी। अपने चार दशकों से अधिक कार्यकाल में उन्होंने आईटीसी के उत्पादों का विस्तार कई नए क्षेत्रों में किया। देवेश्वर आईटीसी में ऐसे समय पर शामिल हुए जब कंपनी अपने कारोबार में डाइवर्सिफिकेशन लाने की कोशिश कर रही थी पर इस दिशा में किए गए लगभग सारे प्रयोग फेल हो चुके थे। इससे साख के साथ-साथ कंपनी को पैसे का भी काफी नुक्सान हुआ था।

योगेश चंद्र देवेश्वर ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी. टेक की डिग्री वर्ष 1968 में प्राप्त की। उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल, मैसाचुसेट्स, से एएमपी डिप्लोमा प्राप्त किया और संयुक्त राज्य अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से होटेलिएरिंग और सेवाओं में उन्नत प्रशिक्षण पर एक कोर्स भी किया।

वाई सी देवेश्वर ने आईआईटी दिल्ली और हावर्ड बिजनेस स्कूल से पढ़ाई की थी। 9 वर्षीय वाईसी देवेश्वर 1968 में कंपनी से जुड़े थे और 1984 में आईटीसी के निदेशक नियुक्त किए गए थे। फिर वे 1996 जनवरी में आईटीसी के सीईओ और चेयरमैन बने। जुलाई 2011 की एजीएम में उन्‍हें 5 साल के लिए चेयरमैन बनाने की घोषणा की गई थी। उन्होंने 2017 में पद छोड़ दिया था।

ऐसे खड़ा किया करोड़ों का एंपायर
देवेश्वर ने सन 2000 में ई-चौपाल शुरू की। इससे कंपनी की पहुंच किसानों तक और बढ़ गई और सस्ते में कंपनी को अपने प्रोडक्ट बनाने के लिए कच्चा माल मिलने लगा। इस मॉडल को बाद में हावर्ड बिजनेस स्कूल में केस स्टडी के तौर पर शामिल किया। 2001 में कंपनी ने सन फीस्ट बिस्कट लॉन्च किया, जिससे बड़ी सफलता मिली।

  • 2002 में कंपनी लाइफस्टाइल और प्रीमियम नोटबुक के कारोबार में उतरी।
  • 2007 में कंपनी ने बिंगो सैनेक्स लॉन्च कर फूड मार्केट में बड़ा शेयर हासिल किया।
  • डाइवर्सिफिकेशन आइडिया पर काम करने के लिए 55 लोगों की मजबूत रिसर्च और डेवलपमेंट टीम बनाई, जिससे कंपनी की आय में बड़ा इजाफा हुआ।
  • आईटीसी लिमिटेड, ऐसा नाम जिससे भारत की तकरीबन पूरी आबादी जुड़ी हुई है।
  • फूड, पर्सनल केयर, ब्रांडेड अपैरल, सिगरेट, होटल, एग्री-बिजनेस या आईटी कोई भी नाम लीजिए, आईटीसी हर क्षेत्र में मौजूदगी रखती है। आईटीसी लिमिटेड की डिक्शनरी में फुल स्टॉप जैसा कोई शब्द नहीं।

10 गुना बढ़ी आईटीसी की आय
वाईसी देवेश्वर के कार्यकाल के दौरान, आईटीसी की आय 5,000 करोड़ से बढ़कर 51,582 करोड़ रुपए हो गई है। वहीं, इस दौरान कंपनी के मुनाफे में 33 गुना की बढ़त आई है। मुनाफा 452 करोड़ रुपए से बढ़कर 14958 करोड़ रुपए हो गया।

इन प्रोडक्ट्स को मिली सफलता

  • 2000 में आईटीसी इंफोटेक इंडिया के साथ आईटी इंडस्ट्री में रखा कदम।
  • 2002 में ‘पेपरक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत नोटबुक्स की प्रीमियम रेंज उतारी।
  • मेंस वियर ब्रांड ‘जॉन प्लेयर्स’ की हुई शुरुआत।
  • मिंट-ओ, कैंडीमैन और आशीर्वाद आटा उतारा।
  • 2003 में स्टूडेंट्स के लिए ‘क्लासमेट’ नाम से नोटबुक रेंज उतारी।
  • बिस्किट सेगमेंट में उतरते हुए ‘सनफीस्ट’ ब्रांड किया पेश।
  • 2005 में फिएमा-डि-विलिस, विवेल जैसे ब्रांड के साथ पर्सनल केयर में उतरी।
  • 2007 में ‘बिंगो’ के साथ ब्रांडेड स्नैक्स में किया प्रवेश।
  • 2010 में इंस्टैंट नूडल्स ब्रांड ‘येप्पी’ लॉन्च किया।
  • 2013 में इंगेज के साथ डियोड्रेंट सेगमेंट में भी की एंट्री।