आजादी के 72 वर्ष बाद भी किश्तवाड़ के इन 20 गांब में ना स्कूटर है ना कार ना ही रोड़

किश्तवाड़:(राजेंद्र भगत) देश को आजाद हुए 72 वर्ष हो चुके हैं पर किश्तवाड़ के ढंगडोरु से सरछी दक्षिण रोड़ आज तक नहीं बना इस आधुनिक युग में भी वहां के 20 गांव के निवासी किश्तवाड़ आने के लिए घोड़े का या फिर पैदल 22 किलोमीटर का लंबा सफर तय करते हैं इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में शिक्षा का स्तर किस प्रकार का होगा आपातकालीन स्थिति में मरीज को अस्पताल तक कैसे लाया जा सकता होगा जानकर हैरानी होगी कि इन गांव में आज भी कार खरीदना एक सपना है कितने दुर्भाग्य की बात है कि यदि आज के इस आधुनिक युग में भी किसी जिले का एक क्षेत्र ऐसा हो जिसमें किसी के पास भी ना स्कूटर है ना चार पहिया वाहन है इसका प्रमुख कारण है कि इन 20 गांव तक जाने के लिए कोई सड़क ही नही है पगडंडी और पहाड़ों के बीच से पैदल चलकर वहां जाया जा सकता है सरकारी आंकड़ों की मानें तो वहां 22 किलोमीटर की रोड का काम चल रहा है परंतु इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी उस सड़क का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि जम्मू के किश्तवाड़ का यह क्षेत्र स्वर्ग से भी सुंदर है परंतु आज तक कि सरकारों ने स्वयं इस क्षेत्र के विकास को रोके रखा है। अगर यहां रोड बने तो क्षेत्र का विकास हो सकता है यह वही मार्ग है यहां हर वर्ष हुध माता की यात्रा चलती है ऐसा माना जाता है कि किश्तवार के दक्षिण का यह क्षेत्र अद्भुत है सुन्दर है जिसके हर जर्रे जर्रे में सुंदरता भरी पड़ी है परंतु एक सड़क ना होने के कारण यह आज भी सुविधाओं से वंचित है।यहां के अधिकतर बच्चे जम्मू पड़ते है ग्रामीणों का कहना है कि अभी भी रोड का काम बंद पड़ा है लोगों ने राज्यपाल शासन में न्याय मिलने की उम्मीद जताई है उन्हें लगता है कि जब जब राज्य में राज्यपाल शासन लगता है तो रोड का काम शुरू हो जाता है परंतु सरकार बनते ही फिर से काम बंद हो जाता है एक ग्रामीण ने बताया कि पिछले 35 वर्षों से रोड का काम चल रहा है परंतु 22 किलोमीटर का रोड अभी तक नहीं बन पाया और आगे कब बनेगा इसकी कोई उम्मीद नहीं है