किसान को पता ही नहीं और बैंक में बन रहा था साढ़े आठ लाख रुपए का केसीसी

विदिशा: जिले की यूनियन बैंक की गंजबासौदा शाखा में किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी बनाने में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। जिसमें नटेरन क्षेत्र के ग्राम नोराजखेड़ी के एक किसान के नाम से साढ़े आठ लाख रुपए का केसीसी बनाया जा रहा था। लेकिन क्षेत्र के पटवारी की सतर्कता से यह फर्जीवाड़ा नहीं हो पाया। इस पूरे मामले में बैंक की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।

नटेरन तहसील के ग्राम नोराजखेड़ी निवासी महेश शर्मा ने बताया कि गांव में उनके नाम पर अलग अलग खातों में 25 बीघा जमीन दर्ज है। दो दिन पहले उनके पास गांव के पटवारी सत्यनारायण सोनी का फोन आया। जिसमे उन्होंने केसीसी बनाने के बदले 25 बीघा जमीन यूनियन बैंक बासौदा में बंधक करने को लेकर पूछताछ की। यह सुनते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने पटवारी से कहा कि वे किसी बैंक से केसीसी नहीं बनवा रहे। जिस पर पटवारी सोनी ने बताया कि उनके पास बैंक से लेटर मिलना बताया। जिसमें कहा गया था कि बैंक द्वारा किसान का केसीसी बनाया जा रहा है। जिसके लिए जमीन बंधक रखने की कार्रवाई की जाए। महेश के भांजे लालू ने बताया कि पटवारी से यह जानकारी मिलने के बाद दूसरे दिन वे नटेरन तहसील कार्यालय पहुंचे। जहां पटवारी ने उन्हें बैंक का पत्र दिखाया। यह पत्र देखकर वे भी हैरत में पड़ गए। इसके बाद उन्होंने लिखित रूप से पत्र लिखकर बैंक को सूचना दी कि उन्होंने केसीसी के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। लालू का कहना था कि यदि पटवारी उन्हें जानकारी नहीं देते तो महेश शर्मा के नाम से साढ़े आठ लाख रुपए निकल जाते। लालू के मुताबिक बैंक और प्रशासन को इस मामले की जांच कर फर्जीवाड़ा करने वाले व्यक्ति को पकड़ना चाहिए।

प्रबंधक बोले, आवेदक की कर रहे खोजबीन

इधर, यूनियन बैंक बासौदा के शाखा प्रबंधक शशिभूषण सिंह का कहना है कि वे इस मामले में केसीसी के लिए आवेदन बनाने वाले कि खोजबीन कर रहे है। उनका कहना था कि इस प्रकरण में सर्च रिपोर्ट तैयार कराई गई थी। लेकिन यह रिपोर्ट भू अभिलेखों के आधार पर तैयार की जाती है। इसलिए गड़बड़ी का पता नहीं चल पाया। इधर, बैंकिंग के जानकार इस प्रकरण में बैंक की भूमिका संदिग्ध मान रहे है। जानकारों का कहना है कि फील्ड आफिसर की जांच के बाद ही केसीसी का प्रकरण तैयार होता है। इसमें ऋण पुस्तिका सहित जमीन के अन्य दस्तावेज और आधार कार्ड भी लगता है।लेकिन इस प्रकरण में इन सब की अनदेखी की गई।