370 पर कौन कर रहा है ‘ब्लैकमेल’

जम्मू (राजेंद्र भगत) केंद्र की नई सरकार के पुनः सत्ता में आते ही 370 पर बहस तेज हो गई है जम्मू कश्मीर की जनता दो दड़ों में बंटी हुई दिखती है कोई 370 को स्थाई रखने की उपलब्धियां बता रहा है तो कोई इसके नुकसान।
                  राज्य के तीनों भागों में बसने वाले लोगों की इस पर अलग-अलग राय है घाटी जहां 370 के साथ खड़ी दिखाई देती है तो वहीं जम्मू और लेह के लोग विपरीत राय रखते हैं सोशल मीडिया में सक्रिय, अपनी राय देने वाले लोग अधिकतर पार्टियों से जुड़े हैं जो अपनी अपनी पार्टी के मुखिया की राय को ही अपनी राय बता कर जनता को बरगला रहे हैं इसका प्रमाण निकाय चुनावों तथा लोकसभा के चुनावों के दौरान उन लोगों के मुंह से सुनने को मिला जो पहले 370 का विरोध करते थे परंतु पार्टी बदलते ही 370 के हक में आकर खड़े हो गए। दूसरी तरफ वह लोग भी दिखाई दिए जो पहले इस धारा के हक में थे परंतु बाद में पार्टी बदलते ही उनकी राय भी 370 के विरुद्ध नजर आने लगी
               वर्तमान में इस मुद्दे पर ऐसे लोग भी नजर आए जो जानते तक नहीं कि 370 है क्या इसके क्या प्रावधान है इसके लाभ हानि क्या है ऐसा लगता है कि 370 केबल पार्टियों में ज़िद की लड़ाई बन गया है इसके होने या ना होने से किसी को कोई लाभ हानि नहीं है इस धारा के तहत राज्य में कोई भी बाहरी व्यक्ति स्थाई रूप से नहीं रह सकता संपत्ति नहीं खरीद सकता
__ तो क्या राज्य में कोई बाहरी लोग नहीं रह रहे?
__ क्या वह बाहरी लोगों की यहां सम्पत्तियां नही है?
__ क्या बाहरी लोगों की स्थाई बस्तियां नहीं है?
__ क्या बाहरी लोगों के पास राशन कार्ड बिजली कनेक्शन पानी के कनेक्शन नहीं है?
__ क्या यह सब बिना सरकारी मशीनरी के हुआ है?
__ क्या शहर में बाहरी लोगों के होटल,व्यवसाय संपतिया नहीं है?
राज्य में 370 होने के बावजूद जम्मू में इतनी ज्यादा संख्या में रोहंगिया की बस्तियां बन जाना सरकार या एजेंसियों को खबर ना होना क्या यह दलील हजम हो पाएगी। जब केंद्र की सरकार रोहिंग्या जैसे विदेशियों को बाहर  निकालने की बात करती है तो सबसे पहली प्रतिक्रिया 370 बाले राज्य की घाटी से इन रोहंगिया को राज्य से बाहर निकालने का विरोध किया जाता है हालांकि 370 मैं बाहरी राज्य का नागरिक इस राज्य में स्थाई रूप से नही रह सकता तो जब रोहंगिया को बाहर निकालने की बात आती है तो सबसे पहले रोहिंग्या के हक में घाटी से ही आवाजें आने लगती है वह इन्हें राज्य से निकालने के पक्ष में नहीं इससे साबित होता है कि 370 पर केबल केंद्र को ब्लैकमेल करने की रणनीति अपनाई जा रहे हैं बाहरी लोगों का यहां रहना संपत्ति बनाना बसना बड़ी-बड़ी बस्तियों के रूप में होना इन सब का कहीं कोई विरोध नहीं है अपितु विदेशी लोगों के यहां बसने और उनका समर्थन किया जाता है तो क्या 370 का विरोध केवल राजनीतिक दांवपेच और आम जनता को मूर्ख बनाने तक ही सीमित रह गया है। 370 का समर्थन करने वाले खुलकर यह बात क्यों नहीं कहते कि उनकी पार्टियों के शासनकाल में ही बाहरी लोग राज्य में आए संपत्तियां बनाई वोट बैंक बने उनके ही नेता रंगिया के साथ आज कंधे से कंधा मिलाकर समर्थन भी करते देखे जा सकते हैं
        370 का राज्य में होना या ना होना कोई महत्व नहीं रखता यह केवल ज़िद की लड़ाई है इसी की आड़ में अलगाववादियों पर कार्रवाई आतंकियों पर खुल कर कार्रवाई नही हो पाती। बाहरी कंपनियों को राज्य में आने से रोकना, बेरोजगारों का राज्य में इतनी भारी संख्या में होना,विकास के मामले में केवल केंद्र पर निर्भर रहना यह सब कारण दर्शाते हैं कि 370 यहां घाटी को मनमर्जी का माहौल उपलव्ध कराती रही है बहीं जम्मू को गैरकानूनी बस्तियों का शहर बनाने में सहायिक रही है।
वर्तमान में नई युवा पीढ़ी जिसके लिए दिल्ली या मुंबई, चंडीगढ़ अपने दूसरे घर के समान है उनकी सोच बदली है उनके लिए इस राज्य में कोई ऐसी धारा जो देश के दूसरे राज्यों में नहीं है उन्हें शर्मिंदा करती है यह युवा पीढ़ी रोजगार चाहती है बड़ी-बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी जाती है जिसके लिए इन्हें अपना राज्य छोड़कर अन्य राज्यों में शरण लेनी पड़ती है बह अपने दुर्भाग्य को कोसते हैं कि अगर यह सारे संसाधन उन्हें अपने जम्मू कश्मीर में ही प्राप्त होते तो वह अपने घर को छोड़कर बाहरी राज्यों में काम की तलाश में नहीं जाते। 370 का वर्तमान में विरोध आधुनिक भारत की सोच है जिसे कभी ना कभी तो अपनाना ही पड़ेगा मात्र अपनी जिद एवं किसी विशेष क्षेत्र की महत्वाकांक्षा के लिए पूरे राज्य की जनता के विचारों को दबाना असंभव है