ये आस्था का केंद्र है या खतरे की जगह, वीडियो देखकर उड़ जाएंगे आपके होश

शाजापुर। पंडे (पंडित) के इलाज करने के तरीकों, रुपयों को लेकर विवाद और कोटा-इंदौर इंटरसिटी ट्रेन में तीन-चार महीनों से लगातार चैन पुलिंग होने से सुर्खियों में आए ग्राम आक्या चौहानी स्थित धार्मिकस्थल को लेकर और भी कई बातें सामने आ रही हैं। दरअसल जब से यहां पर हर गुरुवार व सोमवार को दूर-दराज से पीड़ित पहुंचने लगे, तभी से पार्किंग के नाम पर जबरिया वसूली शुरू कर दी गई। शाजापुर स्टेशन से गांव तक पहुंचने वाले ऑटो, ट्रॉलियों और पिकअप में सवारियों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाने लगा। ऑटो में 18 से 20, ट्रॉलियों में 40 से 50 तो पिकअप में 30 सवारियां तक बैठा ली जाती हैं।

दूसरी ओर हजारों लोगों की भीड़ होने के बावजूद यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। पैसेंजर ट्रेन से उतरने के बाद कई लोग ट्रैक पर ही बैठे रहते हैं, जबकि कु छ देर बाद ही इंटरसिटी ट्रेन आती है। वहीं मालगाड़ियां भी गुजरती हैं। ऐसे में हजारों लोगों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। बावजूद जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं, जबकि अंधविश्वास के चलते लोगों की भीड़ भी कम होने का नाम नहीं ले रही है।

छोटा सा गांव है आक्या चौहानी

आक्या चौहानी शाजापुर से 11 कि मी की दूरी पर एक छोटा सा गांव है। यहां से गुना-मक्सी रेलवे ट्रैक गुजरा है। आबादी भी ज्यादा नहीं है लेकि न बीते तीन-चार महीने से यह गांव न सिर्फ मप्र बल्कि राजस्थान में भी कई लोगों की जुबां पर है। यहां हर गुरुवार व सोमवार को जत्रा होती है। जिसमें भूत-प्रेत भगाने और बच्चा होने की कामना लेकर राजगढ़, गुना, ग्वालियर, शिवपुरी, उज्जैन, इंदौर, देवास, आगर समेत मप्र-राजस्थान के कई स्थानों से लोग पहुंचते हैं। बीते गुरुवार को पंडे और समिति में रुपयों को लेकर विवाद सामने आया था। वहीं इस गुरुवार को पंडा गोपाल नागर के जत्रास्थल पर नहीं पहुंचने से परतें खुली। प्रशासन तक बात पहुंची और जांच कराई।

ये वजह… जिससे मामला सुर्खियों में आया

पंडे के इलाज के तरीके

पंडा गोपाल नागर के पीड़ितों के इलाज कराने के तरीके अलग है। चांटे मारने, चोंटी पकड़ने और बच्चों को उछाल दिया जाता है। इस गुरुवार को पंडा नागर शाम तक गांव नहीं पहुंचे। इससे हजारों लोगों को वापस लौटना पड़ा।

स्टॉपेज नहीं, फिर भी चैन पुलिंग

आक्या चौहानी पर छोटा सा स्टेशन है। जहां पर बीना-नागदा पैसेंजर ट्रेन रुकती है। इस कारण गुरुवार-सोमवार को यहां कई लोग इस ट्रेन से आक्या चौहानी पहुंचते हैं लेकि न इसके कुछ देर बाद यहां से कोटा-इंदौर इंटरसिटी ट्रेन भी गुजरती है। तीन-चार महीने पहले ये ट्रेन शाजापुर के बाद सीधे मक्सी में ही रुकती थी किंतु जबसे लोग यहां पहुंचने लगे तो इस ट्रेन को चैन पुलिंग कर रोका जाने लगा।

भीड़ प्रबंधन के इंतजाम नहीं होना

हजारों लोगों की मौजूदगी के बावजूद भीड़ प्रबंधन के कोई इंतजाम नहीं है। पुलिसकर्मी तैनात नहीं होते। रेलवे ट्रैक पर लोग बैठ जाते हैं। बावजूद उन्हें नहीं हटाया जाता। प्रति वाहन 30 रुपए पार्किंग शुल्क वसूलने से विवाद की स्थिति बनती है। यात्री वाहनों में तीन से चार गुना तक सवारियां बैठाई जाती हैं। इससे हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है।

फसलें बर्बाद कर देना

आक्या चौहानी रेलवे स्टेशन से जत्रास्थल तक जाने के लिए खेतों से होकर रास्ता गुजरता है। वर्तमान में कि सानों ने सोयाबीन समेत अन्य फसलें बो रखी है, जो यात्रियों के गुजरने से बर्बाद हो रही है। इस गुरुवार को कई कि सानों की फसलें बर्बाद हुई तो हंगामा भी हुआ।

रुपयों का विवाद

हजारों लोग यहां रुपए भी दानस्वरुप देते हैं। ऐसे में अब रुपयों को लेकर विवाद भी सामने आने लगा है। बीते गुरुवार को यह विवाद सामने आया था। बताया जाता है कि इसे लेकर दो धड़ हो गए। मामले में प्रशासन तक भी खबर पहुंची है। इसलिए एक दिन पहले ही गांव में एक टीम पहुंची थी।

एसपी से बात की

मामला संज्ञान में है। भीड़ प्रबंधन को लेकर एसपी से चर्चा की गई है। – डॉ. वीरेंद्रसिंह रावत, कलेक्टर