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जरा हटके

जरा हटके (9)

पैशावर। इन दिनों एक युवक ने पाकिस्तान सरकार की नाक में दम कर रखा है।  सरकार 25 साल के मंजूर पश्तीन नामक इस युवक और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शनों से परेशान है। मंजूर पश्तीन पश्तून ताहफुज मूवमेंट (पश्तून रक्षा आंदोलन)  का नेतृत्व कर रहा है।
पश्तून ताहफुज मूवमैंट के आंदोकारियों  की मांग है कि पिछले 10 साल में चरमपंथ के खिलाफ कार्रवाई में जो लोग गायब हुए हैं उन्हें सामने लाकर कोर्ट में पेश किया जाए।  ये आंदोलन पाक सरकार के तमाम अवरोधों के बावजूद लगातार बढ़ रहा है और हजारों लोग इनमें शामिल हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कराची में एक कबायली युवक के एनकाउंटर के बाद ये आंदोलन शुरू हुआ।  पहले एनकाउंटर करने वाले पुलिस अफसर की गिरफ्तारी की मांग की गई।  लेकिन बाद में आंदोलन बढ़ता चला गया।  
खैबर पख्तूनख्वां और वजीरिस्तान में इस मांग को लेकर काफी प्रदर्शन हो रहे हैं और मंजूर पश्तीन को सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग आ रहे हैं।  मंजूर का आरोप है कि पाकिस्तान की सेना चरमपंथ को बढ़ावा दे रही है।  इश आंदोलन में अफगानिस्तान की सीमा पर लगे कबायली इलाकों में काले कानून को भी खत्म करने की मांग की जा रही है। साथ ही जिन लोगों के घर सैनिक कार्रवाई में तबाह हुए, उनके लिए मुआवजा भी देने की मांग हो रही है। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन पर मीडिया को रिपोर्टिंग नहीं करने की हिदायत दी है। 

कहते हैं कि हुनर और कामयाबी उम्र की मोहताज नहीं होती। कुछ बच्चे बचपन से ही असाधारण प्रतिभा के धनी होते हैं। वह कुछ ऐसी उपलब्धियां हासिल करके दिखाते हैं जो उन्हें बना देता है आम से खास। ऐसा ही कुछ कर दिखया 12 साल के आदित्य ने जो आज अपने होनर के कारण एक ऑनलाइन कंपनी का मालिक बन गया है। जबलपुर का रहने वाला आदित्य 82 ऐप बना चुका है वह 9 साल की उम्र से ऐप डेवलप कर रहा है। यही नहीं वह जावा लैंग्वेज की ऑनलाइन ट्यूशन दे रहा है। 

जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 8वीं में पढ़ने वाला आदित्य जब 9 साल का था तब उसने लैपटॉप पर खेलते वक्त नोटपैड प्लस-प्लस सॉफ्टवेयर डाउनलोड किया। इस नोटपैड पर टाइप करते समय कुछ एरर आ गया। जिसके बाद उसे सेटिंग पर जावा लैंग्वेज दिखी। इसके बारे में जानने के लिए उसने सर्च किया और आज वह इस लैंग्वेज में एक्सपर्ट बन गया। वह गूगल प्ले स्टोर में अपने बनाये हुए एप को लेकर चर्चा में आया था। आदित्य ने बताया कि उसे मैथ्स और फिजिक्स में हमेशा से दिलचस्पी थी। वह कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग कर स्वयं की कंपनी खोलना चाहता है। 

आदित्य के पिता धर्मेन्द्र चौबे ऑर्डिनेंस फैक्टरी खमरिया में जूनियर वर्क्स मैनेजर और मां अमिता निजी स्कूल में साइंस टीचर हैं। उन्होंने अपने पिता की लिए एक स्पेशल कैलकुलेटर एप भी बनाया है जिसमे अनलिमिटेड नंबर्स तक कैलकुलेशन किया जा सकता है। फ़िलहाल आदित्य के 48 एप अभी गूगल प्ले स्टोर व एप्टॉयड पर लोड होने के लिए वेरीफिकेशन मोड पर है जो जल्दी ही प्ले स्टोर पर देखे जा सकते है।  उनके हुनर को देखते हुए बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीईओ की बनाई हुई ऑनलाइन कम्युनिटी ने भी इन्हें अपने से जोड़ लिया है। जहां ये अपने आइडिया और स्ट्रैटिजी शेयर करते हैं। 

बर्लिन। जर्मनी में एक गुडिय़ा ने पुलिस की नींद उड़ा दी लेकिन जांच करने पर सच्चाई कुछ और ही निकली । देश के दक्षिण हिस्से में बिना सिर वाले एक शव की जब पुलिस ने तहकीकात की तो पता चला कि वह एक गुडिय़ा है। बाडेन वुर्टमबर्ग में पुलिस ने बताया कि स्टुगार्ट के समीप रेमस्टॉल में एक नदी के पास सोमवार रात किसी व्यक्ति को बिना सिर के धड़ जैसा कुछ नजर आया। वैसे उसके बदन पर कपड़े थे।

यह सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने संदिग्ध अपराध स्थल को घेर लिया। वहां से शव उठाने के लिए अग्निशमन कर्मचारियों को भी बुला लिया गया क्योंकि जहां यह था, वहां पहुंचना मुश्किल था। पुलिस ने आज एक बयान में कहा कि जब अग्निशमन कर्मी उसके पास पहुंचे तब उन्हें पता चला कि यह तो महज गुड़िया (खिलौना) है।

केनबराः आस्ट्रेलिया में फूडबैंक द्वारा 1,000 माता-पिता पर किए गए  सर्वेक्षण में पाया गया कि बीते 12 महीनों में 20 फीसदी से ज्यादा बच्चे भूखे रह रहे हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, फूडबैंक  के सर्वेक्षण अनुसार15 साल से कम उम्र के  22 फीसदी बच्चे ऐसे परिवार में रहते हैं, जो बीते 12 महीनों में कभी न कभी खाने से वंचित रहे। यह भी पाया गया कि स्कूल जा रहे पांच बच्चों में से एक बच्चा हफ्ते में एक बार बिना नाश्ता किए स्कूल जाता है और दस में से एक बच्चा कम से कम हफ्ते में एक बार पूरा दिन बिना खाए रहता है।

फूडबैंक विक्टोरिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डावे मैकनामारा कहना है कि एक समाज के तौर यह हमारे लिए बहुत दुखद है।  सर्वेक्षण में पाया गया है कि वयस्कों की तुलना में बच्चों के बिना भोजन रहने की संभावना अधिक रही। लेकिन 29 फीसदी माता-पिता ने कहा कि वे हफ्ते में कम से कम एक बार बिना भोजन के रहे, जिससे उनके बच्चे खाना खा सकें।

मैकनामारा ने कहा, “कुछ बच्चे कागज खा रहे हैं। उनके माता-पिता ने उनसे कहा है कि पर्याप्त भोजन नहीं है और यदि आपको भूख लगती है तो आपको कागज चबाना होगा।”रिपोर्ट में कहा गया है कि जीवनयापन लागत की वजह से माता-पिता को अपने बच्चों को खिलाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे मेडिकल छात्र को गिरफ्तार किया है जो 5 महीने से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) में फर्जी डॉक्टर बनकर रह रहा था। उसकी पहचान बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले अदनान खुर्रम के रूप में हुई है जिसने मेडिकल छात्रों और अलग-अलग डिपार्टमेंट के डॉक्टरों से दोस्ती बढ़ाई। यही नहीं खुद को रेजीडेंट डॉक्टर बताकर वह नेताओं के साथ फोटो खिंचवाता था और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था। 

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को खुर्रम को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में फर्जी डॉक्टर की जानकारी देख पुलिस भी हैरान रह गई। उसे दवाओं, एम्स के डॉक्टरों और वहां के विभागाध्यक्षों की पूरी जानकारी थी। वह एम्स के डॉक्टरों की डायरी लेकर घूमता था। वह जिस डॉक्टर से मिलता था उसका नाम डायरी में लिख लेता था। मेडिकल की जानकारी होने का फायदा उठा वो एम्स में फर्जी डॉक्टर बना हुआ था। हालांकि उसका मकसद अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है क्योंकि वह पुलिस के आगे अपने बयान बदल रहा है। 

आरोपी का कहना है कि उसने एक बीमार परिवार को एम्स में जल्द दाखिला दिलाने के लिए ऐसा किया। दूसरा कारण उसने यह बताया कि उसे मेडिकल का पेशा काफी पसंद है और उसे डॉक्टरों के साथ वक्त बिताना अच्छा लगता था इसलिए उसने ऐसा किया। खुर्रम बीते पांच महीने से एम्स में था लेकिन कुछ डॉक्टरों को उसकी हरकतें संदिग्ध लगीं। डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इसकी शिकायत चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर से की तो मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने खुर्रम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 419 और 468 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। 

आरडीए अध्यक्ष हरजीत सिंह ने कहा कि उन्हें तब संदेह हुआ जब खुर्रम हमेशा लैब कोट पहने, गले में स्टेथोस्कोप लटकाए घूमता रहता था। वह अलग-अलग डॉक्टरों से अलग-अलग दावे करता था। उन्होंने कहा कि एम्स में लगभग 2 हजार रेजिडेंट डॉक्टर हैं जिन्हें पहचानना मुश्किल है। वह इसी का नाजायज फायदा उठाता था।जब भी एम्स में कोई कार्यक्रम होता था तो ये उसमें शामिल हो जाता है। 

तमिलनाडु में चिथिरई महीने में मनाए जाने वाले नए साल पर मां अंबिगई मुथुमरीयाम्मन की पूजा के लिए मंदिर को विशेष रूप से सयाजा गया है। इस मंदिर की भव्य सजावट के लिए करोड़ों रुपये का खर्चा किया गया है। कोयंबटूर में मां के मंदिर की साज सज्जा में चार करोड़ रुपये और मूर्ति के आभूषणों में करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए।

मूर्ति की सजावट में खर्च किए करोडों

मूर्ति की सजावट में 2000 और 500 के नोटों को किस तरह प्रयोग किया गया है, यह आप तस्वीरों में देख सकते हैं। नोटों की सजावट सिर्फ मूर्ति पर ही नहीं है बल्कि मंदिर की दीवारों को भी इन नोटों से सजाया गया है। तमिल हिंदू कैलेंडर के मुताबिक चिरिथई (14 अप्रैल) को यहां के लोग नया साल मनाते हैं। थई (14 जनवरी) को कृषि से संबंधित पोंगल भी मनाया जाता है। दरअसल, साल 2008 में तत्कालीन द्रमुक सरकार ने तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें तमिल नववर्ष को 14 जनवरी कर दिया गया, यह पोंगल के दिन पड़ता है। वहीं चेन्नई के अरुंबक्कम में बाला विनयागर मंदिर में भी तमिल नए साल के मौके पर भारतीय नोटों से सजाया गया था। इस सजावट के लिए करीब 4 लाक रुपयों का इस्तेमाल किया गया था। बता दें कि प्रत्येक वर्ष इस मौके पर मंदिर को इसी प्रकार सजाया जाता है। 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को केंद्र की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत’ योजना देश को समर्पित की। मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो आदिवासी जिले बीजापुर आए हैं। वह पहले जगदलपुर पहुंचे फिर वहां से वायुसेना की कड़ी सुरक्षा के बीच नक्सल प्रभावित जिले बीजापुर के जांगला पहुंचे। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र के कार्यकर्ता और बच्चों से बातचीत की। वहीं परियोजना के शुभारंभ से पहले पीएम ने एक आदिवासी महिला को अपने हाथों से चप्पल पहनाई।

दरअसल चरण-पादुका योजना के तहत पीएम ने महिला को चप्पलों का जोड़ा दिया। इस योजना के तहत तेंदू पत्ता बीनने वाली आदिवासी महिलाओं को चप्पलें दी जानी हैं जिससे वह जंगलों में आसानी से चल सकें। अपने संबोधन में मोदी के कहा कि 100 से ज्यादा जिलों में स्वतंत्रता के बाद अब तक पिछड़ापन है, इन जिलों की कोई गलती नहीं थी। बाबा साहेब के संविधान में सबके लिए समान अवसर थे फिर ये जिले क्यों पीछे छूट गए। बीजापुर जैसे जिले पर पिछड़ा होने का लेबल लगाया गया। पीएम ने कहा कि अब पिछड़े जिलों में नई सोच, नई आशाओं के साथ बड़े पैमाने पर काम होने जा रहा है।

बता दें कि प्रधानमंत्री संविधान निर्माता डा बी आर आंबेडकर की जयंती के मौके पर राज्य का दौरा कर रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार का मकसद वर्ष 2022 तक 1.5 लाख स्वास्थ्य और वेलनेस केंद्र खोलना है जहां रक्त चाप, मधुमेह, कैंसर और वृद्धावस्था जनित रोगों समेत कई बीमारियों का इलाज किया जाएगा। इस योजना के तहत सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ( एनएचपीएस ) की व्यापक रूपरेखा तैयार की है और लाभार्थियों की पहचान करने के मापदंड तय करने का काम चल रहा है। 

लंदन। इंग्लैंड में उलझे हुए रिश्तों व मर्डर की रौंगटे खड़े करने वाला मामला सामने आया है।यहा एक व्यक्ति ने अपनी ही बेटी के साथ सम्बन्ध बनाए, बच्चा भी पैदा किया, उसे पत्नी बनाया फिर उसकी हत्या कर दी।   न्यू इंग्लैंड के कनेक्टिकट में स्टीवन प्लाड्ल ने अपनी बेटी केटी प्लाड्ल की हत्या कर दी, जिससे वो एक पत्नी की तरह सम्बन्ध रखता था। अपनी बेटी की हत्या के बाद उसने अपने 7 महीने के बेटे व खुद की जान भी ले ली।

जानकारी के मुताबिक स्टीवन प्लाड्ल  ने ये कदम इसलिए उठाया क्योंकि उसकी पत्नी ने उसे छोड़ दिया था।  स्टीवन प्लाड्ल  ने अपनी बेटी केटी प्लाड्ल की हत्या  के अलावा साथ स्टीवन ने केटी को गोद लेने वाले शख्स की भी गोली मार कर हत्या कर दी.।केटी और उसे गोद लेने वाले व्यक्ति का शव एक पिकअप ट्रक में पाया गया, जबकि स्टीवन और केटी से जन्मे बेटे की लाश घर से मिली। दरअसल स्टीवन प्लाड्ल, केटी प्लाड्ल की मां का पति था।उसने उस वक्त बेटी रही केटी प्लाड्ल से संबंध बनाए और केटी के गर्भवती होने पर उसकी मां से तलाक ले लिया।

स्टीवन और केटी को जनवरी में इन्सेस्ट (सगे-संबंधियों के साथ संबंध बनाने) के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था। केटी प्लाड्ल जब बच्ची थी, तब उसे दूसरे परिवार ने गोद ले लिया था, लेकिन 18 साल की होने पर उसने अपने असली मां-बाप के संपर्क में रहने का फैसला किया।जब केटी अपनी मां और स्टीवन के साथ रहने आई, तो स्टीवन के 6 और 11 साल के दो बच्चे थे। केटी के गर्भवती होने पर स्टीवन ने अपने दोनों बच्चों से कहा कि वे केटी को बहन नहीं बल्कि सौतेली मां मानें। ये जानकारी कोर्ट के दस्तावेज से मिली है।

स्टीवन प्लाड्ल की मां ने उत्तरी कैरोलिना में पुलिस को फोन कर बताया कि उसके बेटे ने उसे कॉल किया था, उस दौरान वो काफी तनाव में था।इसलिए प्लाड्ल की मां ने पुलिस से अपने पोते की सुरक्षा के लिए गुहार लगाई।स्टीवन प्लाड्व की मां ने कहा, 'उसने मुझे पुलिस को फोन करने के लिए कहा था।' पुलिस ने घर से बच्चे का शव निकाला, लेकिन बच्चे को कैसे मारा गया, इस बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अंबेडकर जयंती के मौके पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पहुंच कर 'आयुष्‍मान भारत' योजना का शुभारंभ क‍िया। अपने इस दौरे में पीएम नारी को सम्मान देते हुए दिखाई दिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लड़कियों के हौंसले का जिक्र करते हुए कहा कि यहां की बेटियां विश्वस्तर पहचान बना रही हैं मेरा, उनको नमन। जहां एक तरफ पीएम ने बुजुर्ग महिला को अपने हाथों से चप्पल पहनाई तो वहीं दूसरी ओर दंतेवाड़ा की सविता साहू के ई-रिक्शे की सवारी भी की। मोदी ने ट्विटर पर अपने इस सफर की जानकरी दी।

PMO India
 
@PMOIndia
 

आज मुझे सविता साहु जी के ई-रिक्शा पर सवारी का अवसर भी मिला। सविता जी के बारे में मुझे बताया गया कि उन्होंने नक्सली - माओवादी हिंसा में अपने पति को खो दिया था। इसके बाद उन्होंने सशक्तिकरण का रास्ता चुना, सरकार ने भी उनकी मदद की और अब वो एक सम्मान से भरा हुआ जीवन जी रही हैं: PM

 
 पीएम ने ट्वीट ​​कर लिखा कि आज मुझे सविता साहू जी के ई-रिक्शा पर सवारी का अवसर भी मिला। उनके बारे में मुझे बताया गया कि उन्होने नक्सली-माओवादी हिंसा में अपने पति को खो दिया था। इसके बाद उन्होंने सशक्तिकरण का रास्ता चुना, सरकार ने भी उनकी मदद की और अब वो एक सम्मान से भरा हुआ जीवन जी रही हैं। पीएम ने सविता की कहानी बताते हुए राज्य के नक्सिलयों से हिंसा छोड़ने का आग्रह किया और कहा कि सरकार उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

बता दें कि सविता साहु छत्तीसगढ़ की घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा जिले की एक ई-रिक्शा चालक है। पीएम  ने अपने रेडियाे कार्यक्रम मन की बात के 40वें एपिसोड में इस महिला का जिक्र किया था। उन्होंने दंतेवाड़ा को लेकर कहा था कि प्रशासन कि मजबूत इच्छाशक्ति ने यहां की महिलाओं को ई-रिक्शा के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए बड़ी पहल की है। नगर में आदिवासी महिलाओं को सड़क पर पायलेट के रूप में साफ देखा जा सकता है। इतना ही नहीं नगर के अंदरूनी इलाकों में जहां कभी माओवादियों की सीटी बजती थी वहां आज ये महिलाएं अपनी सवारी के लिए सीटी बजा रही हैं। 

पीएम ने कहा था कि मैं दंतेवाड़ा की उन महिलाओं को बधाई देना चाहता हूं जो ई-रिक्शा चलाकर स्वावलंबी बन रही हैं। दंतेवाड़ा की सविता साहू और गीदम ब्लॉक की कुंती यादव ने 11 अक्टूबर को दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात कर अपने ई-रिक्शा के बारे में बताया था। इस दौरान मोदी ने इन दोनों से काफी देर तक संवाद किया और उनके बारे में जानकारी हासिल की। बाद में उन्होंने सभी बातों का उल्लेख ‘मन की बात’ में किया। 

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