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देश

देश (16)

दुनिया में भगवान है इस बात को तो कई लोग मानते हैं लेकिन कुछ लोग खुद ही भगवान बन जाते हैं। इन भगवानों के प्रति लोगों की अटूट आस्था थी। लोग इन्हे अपना सच्चा भगवान मानते थे। जो इनकी पूजा करता था उसकी हर मन्नत पूरी होती थी। लेकिन इन भगवानों को भी जेल की हवा खानी पड़ी। हम बात कर रहे कुछ ऐसे बाबाओं की जो लोगों की नजरों में भगवान से भी ऊपर थें। और बाद में उनकी सच्चाई सामनें आने पर उन्हे जेल की हवा खानी पड़ी। और दुनिया भर की नजरों से गिरना पड़ा। ऐसे कई सारें बाबा है जो दुष्कर्म, जालसांजी, धोखाधड़ी में फंस चुके है। तो आइए जानते है ऐसे ही कुछ बाबाओं की कहानी…

1. आसाराम बापू

जोधपुर कोर्ट ने बाबा आसाराम को जोधपुर कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इससे पहले कोर्ट ने आसाराम को आसाराम सहित तीन अन्. को दोषी करार दिया था। और शिवा और प्रकाश को बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि बाबा आसाराम बलात्कारी है। उनके साथ शिल्पी उर्फ संचिता, शरतचंद्र को भी कोर्ट ने दोषी माना है। कोर्ट का ये फैसला साढ़े चार साल बाद आया है और इतने सालों तक बाबा आसाराम जेल में थे।

2. बाबा राम रहीम

पिछले साल बाबा राम रहीम पर फैसला आया था। बाबा राम रहीम पर यौन उत्पीड़न और बलात्कार करने के आरोप थे। उन्हें बड़ी मुश्किल से गिरफ्तार किया गया था और गिरफ्तार करने के बाद बड़ी जल्दी कोर्ट ने उन पर फैसला सुनाया था। इस मामले में उनके सर्मथकों ने काफी बवाल किया था।

3. बाबा रामपाल

बाबा रामपाल अपने आप को 445 साल बाद प्रकट होनेवाल वो हिंदू संत करार देते थे जिसका जिक्र सन 1555में प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने किया था। इन्होने कहा था कि एक ऐसा हिंदू संत प्रकट होगा, जो पूरी दुनिया में भारत को विश्व गुरू के तौर पर स्थापित करेगा और साल 2006 ये उरूज में आए। रामपाल अपने आप को वही संत बताते थे। बाबा रामपाल अपनी अय्याशी और अपने हाईटेक आश्रम को लेकर सुर्खियों में आएं।

इन्होने अपने आश्रम में हर जगह कैमरे लगा रखे थे। और इनके आश्रम में अय्याशी के लिए हर चीज थी, जैसे बुलेटप्रुफ सिंहासन, फाइवस्टार बेडरूम और आश्रम, हाईटेक तहखाना। इन्हे भी जेल की हवा खानी पड़ी।

4. इच्छाधारी संत बाबा भीमानंद

पैसे ब्याज पर देने के धंधे से भीमानंद ने कई सौ करोड़ रुपए की जायदाद और काला खजाना जुटाया। सांप का साथ होना स्वामी भीमानंद की पहचान बन गया। ये शख्स भगवा चोला ओढ़कर दुनिया को अच्छा बनने का प्रवचन देता था। जब ये गेरुआ वस्त्र पहन कर प्रवचन देता था तो इसका नाम होता था- इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद महाराज चित्रकूटवाले।

लेकिन सांप वाला ये इच्छाधारी बाबा रात ढलते ही अपने असली रूप में आ जाता था। गेरुआ वस्त्र उतर जाता था, पैरों पर टाइट जींस, जिस्म पर नए फैशन की टीशर्ट। हाथों में मोबाइल और महंगी कार से रात के अंधेरे में जिस्म के धंधे का संचालन। ये 600 कॉलगर्ल के साथ जिस्मफरोशी का धंधा चलाते थे। इनका सेक्स रेकेट पकड़ा गया और आज ये जेल की सलाखों के पीछे है।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने आज कहा कि भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज करने का उनका फैसला समय से और बगैर किसी जल्दबाजी के लिया गया है। यह फैसला एक महीने तक 'पूरी तरह सोच विचार' करने के बाद लिया गया।

मैं इस फैसले से संतुष्ट
महाभियोग प्रस्ताव खारिज करने के एक दिन बाद नायडू ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी इसकी अनुमति देती है लेकिन आखिरकार सच की जीत होती है। मुझसे जो अपेक्षा की जाती थी वह न्यायपूर्ण काम मैंने बेहतरीन तरीके से किया। उन्होंने कहा कि संविधान और न्यायाधीश जांच कानून 1968 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करते हुए निर्णय किया। उच्चतम न्यायालय के 10 वकीलों के एक समूह से नायडू ने कहा कि मैंने अपना काम किया है और मैं इससे संतुष्ट हूं। ये वकील महाभियोग प्रस्ताव खारिज करने के फैसले पर उपराष्ट्रपति को बधाई देने के लिए आए थे।

नायडू ने महाभियोग प्रस्ताव को किया खारिज 
खबरों के अनुसार नायडू ने वकीलों से कहा कि राज्यसभा के सभापति का दफ्तर महज डाकघर नहीं है बल्कि एक संवैधानिक संस्था भी है जो उप राष्ट्रपति भी है। उन्होंने कहा कि सीजेआई देश के सर्वोच्च न्यायिक पदाधिकारी हैं और उनसे जुड़ा कोई भी मुद्दा अगर सार्वजनिक तौर पर आता है तो उसे तय प्रक्रियाओं के मुताबिक जल्द से जल्द सुलझाने की जरूरत है ताकि माहौल को ज्यादा खराब होने से रोका जाए। नायडू ने सोमवार को कांग्रेस सहित सात विपक्षी पार्टियों ओर से दिए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया था। कांग्रेस ने उनके फैसले को अवैध और जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया था। 

चेन्नई। अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने रविवार को  मंजूर किए गए अध्यादेश में सिर्फ 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किए जाने पर हैरानगी जताते हुए कहा कि क्या 14, 15 और 16 साल की लड़कियां बच्चे नहीं हैं।  हासन ने यह भी कहा कि परिवारों को अपने लड़कों को जिम्मेदार बनाना चाहिए।  ‘मक्कल निधि मैअम’ (एमएनएम) प्रमुख हासन ने यूट्यूब के जरिए अपनी पार्टी के कार्यकर्त्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए यह कहा। गौरतलब है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश को मंजूरी देकर 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों को मौत की सजा सहित कठोर दंड के प्रावधान का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

हासन ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘आप तय करेंगे कि मुझे क्या होना चाहिए...मुख्यमंत्री या विपक्षी नेता।’’ जाति प्रथा के उन्मूलन पर उन्होंने कहा कि यह एक रोग है और इसका खात्मा होना चाहिए। जाति आधारित भेदभाव गरीबी का एक कारण है। जाति का फौरन उन्मूलन नहीं हो सकता। उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर इसमें बदलाव की अपील की। उन्होंने ग्राम स्वराज को एक संभावना बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी एक गांव को पहले ही गोद ले चुकी है तथा और भी गांवों को गोद लेगी।

 आज पूरा विश्व 'अर्थ डे' यानी 'पृथ्वी दिवस' मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत अमेरिकी सीनेटर गेलोर्ड नेल्सन ने 1970 में की थी। इसका उद्देश्य पूरे विश्व को पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस अवसर पर पृथ्वी को भविष्य की पीढिय़ों को बेहतर ग्रह बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

Narendra Modi
 
@narendramodi
 

On , let us reaffirm our commitment towards creating a better planet for our future generations. Let us work together to mitigate the menace of climate change. This would be a great tribute to our beloved Mother Earth.

 
 


पीएम ने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम करने के लिए लोगों को एक साथ काम करना होगा। यह हमारी मां धरा के लिए एक बड़ी श्रद्धांजलि होगी। यहां एक आधिकारिक बयान में प्रधानमंत्री ने उन सभी व्यक्तियों और संगठनों को बधाई दी जो प्रकृति के साथ सछ्वाव को बढ़ावा देने और सतत् विकास सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे थे। 

Narendra Modi
 
@narendramodi
 

I compliment all those individuals and organisations who are working towards promoting harmony with nature and ensuring sustainable development.

 
 बता दें कि पृथ्वी दिवस की शुरुआत एक अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने की थी। 1969 में सांता बारबरा, कैलिफोर्निया में तेल रिसाव की भारी बर्बादी को देखने के बाद वे इतने आहत हुए कि उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को लेकर इसकी शुरुआत करने का फैसला किया। 1970 से 1990 तक यह पूरे विश्व में फैल गया और 1990 से इसे अंतरराष्ट्रीय दिवस के रुप में मनाया जाने लगा। इस आंदोलन में संकल्प लिया गया कि पृथ्वी को नष्ट होने से बचाया जायेगा और कोई ऐसा काम नहीं किया जायेगा जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे। इस दिवस का मकसद आम इंसान को यह समझाना है कि वो पॉलिथीन और कागज का इस्तेमाल ना करें, पौधे लगाये क्योंकि धरा है तो जीवन है। 

बीजेपी से नाराज चल रहे पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने अाज बीजेपी छोड़ने का एेलान किया है। उनके इस एेलान के बाद भाजपा में हड़कंप मच गया। यशंत ने भाजपा छोड़कर पार्टी को बड़ा झटका दिया है। यशवंत काफी लंबे समय से अपनी ही पार्टी की अालोचना करते रहते थे। यशवंत ने नोटबंदी और जीएसटी लागू करने के फैसले को लेकर भी मोदी सरकार पर कड़े सवाल किए। सरकार की नीतियों को उन्होंने बहुत बार गलत ठहराया।  अाज यशवंत ने कहा कि 'मैं बीजेपी के साथ अपने सभी संबंधों को समाप्त करने का ऐलान करता हूं।'

सिन्हा ने इसी साल 30 जनवरी को राष्ट्र मंच के नाम से एक नए संगठन की स्थापना की थी। तब उन्होंने कहा था कि यह संगठन गैर-राजनीतिक होगा और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगा। बता दें कि शनिवार को कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मीटिंग के बाद यशवंत सिन्हा ने यह फैसला लिया है। 

सिन्हा ने कहा कि यह नहीं है कि वह भाजपा छोड़कर किसी और पार्टी में शामिल हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैंने चार साल पहले चुनाव लड़ने से संन्यास लिया था आज दलगत राजनीति से संन्यास ले रहा हूं। आज के बाद किसी भी पार्टी से मेरा कोई रिश्ता नहीं होगा। मैं बीजेपी छोड़ रहा हूं, लेकिन आगे किसी पार्टी को ज्वाइन नहीं करूंगा।
 

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग मामले को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेतली की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके मित्रों ने महाभियोग को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया है और इससे स्पष्ट है कि न्यायाधीश लोया मामले में याचिका न्यायाधीशों को डराने के लिये दायर की गई। वित्त मंत्री ने अपने ब्लाग में लिखा कि जज लोया केस में कांग्रेस पार्टी के झूठे प्रोपेगेंडा की पोल खुल गई है और उसी का बदला लेने के लिए यह महाभियोग प्रस्ताव लाया गया है।

न्यायाधीश लोया मामले में स्थिति हुई स्पष्ट
जेतली ने कहा कि यह न्यायाधीशों को डराने और दूसरे न्यायाधीशों को संदेश देने का प्रयास है कि अगर आप मेरी बात से सहमत नहीं होंगे तब 50 सांसद बदले की कार्रवाई के लिये पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ आरोप पुराने और महत्वहीन हैं और इनका न्यायिक कामकाज से कुछ भी लेनादेना नहीं है। वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि महाभियोग बारे में कोई भी निर्णय पार्टी लाइन या व्हीप के आधार पर नहीं किया जा सकता है। जेतली ने कहा कि अब जबकि न्यायाधीश लोया के मामले में स्थिति स्पष्ट हो गई है तब मेरे मन में कुछ बातें सामने आ रही हैं। प्रेस कांफ्रेंस करने वाले उच्चतम न्यायालय के चार न्यायाधीश सभी अनुभवी और उच्च गारिमा वाले व्यक्ति हैं। क्या उन्होंने टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जांच परख की?   

महाभियोग को हथियार बना रही कांग्रेस 
वित्त मंत्री ने सवाल किया कि क्या आज पेश महाभियोग का प्रस्ताव उस प्रेस कांफ्रेंस का सीधा परिणाम था? क्या महाभियोग की पहल यह चलन स्थापित करता है कि भारत में राजनीतिक दल महाभियोग को विवादास्पद मामलों में न्यायाधीशों को डराने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे? उन्होंने कहा कि इस संबंध में कुछ लोगों के दुस्साहस की कीमत भारतीय न्यायपालिका को चुकानी पड़ेगी। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के नेतृत्व में सात विपक्षी दलों ने आज भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर ‘गलत आचरण’ का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को महाभियोग का नोटिस दिया है। महाभियोग प्रस्ताव पर कुल 71 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं जिनमें सात सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

देश के बैंकों ने नोटबंदी के बाद अब तक की सबसे ज्यादा नकली करेंसी पकड़ी है। यही नहीं नोटबंदी के बाद संदिग्ध लेनदेन में भी 480 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। संदिग्ध डिपोजिट पर तैयार की गई एक सरकारी रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

FIU की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
केंद्रीय वित्त मंत्रालय की फाइनेंशियल इंजेलीजेंस यूनिट (FIU) ने खुलासा किया हा कि प्राइवेट, सरकारी और को-ऑपरेटिव क्षेत्रों समेत सभी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने संयुक्त रूप से 2016-17 के दौरान 400 फीसदी ज्यादा संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट दर्ज की है। इन संदिग्ध लेनदेन की संख्या 4.73 लाख से ज्यादा है।

रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग और कई वित्तीय चैनलों में जाली करेंसी के लेनदन में पिछले साल की अपेक्षा 2016-17 के दौरान करीब 3.22 लाख मामले अधिक सामने आए हैं। वित्तीय वर्ष 2015-16 में जाली करेंसी के कुल 4.10 लाख मामले सामने आए थे और यह आंकड़ा बढ़कर वित्तीय वर्ष 2016-17 में 7.33 लाख हो गया है। नकली करेंसी पर यह आंकड़ा अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। बता दें कि नकली करेंसी के लिए रिपोर्ट पर आंकड़ों को संकलित करने का काम सबसे पहले वित्तीय वर्ष 2008-09 में शुरू हुआ था।

FIU की रिपोर्ट के मुताबिक, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से आतंकवाद को सहायता पहुंचाई गई। वित्तीय वर्ष 2016-17 में संदिग्ध लेनदेन के करीब पांच लाख मामले दर्ज किए गए। वित्त वर्ष 2015-16 की तुलना में यह चार गुना ज्यादा हैं। 

बेंगलुरु। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने आज कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में विकास का पैमाना बदल दिया है और यदि कर्नाटक में भाजपा सत्ता में आती है तो राज्य को ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ मॉडल राज्य के रुप में तब्बदील कर दिया जायेगा।

शाह ने यहां व्यापारियों और उद्योग से जुड़े लोगों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा,' 2014 से पहले देश में हालात बहुत खराब थे। हमने कार्य का पैमाना बदल दिया है। हमारी सरकार ने सुनिश्चित किया है कि कोई घर बिना शौचालय के न रहे। प्रत्येक व्यक्ति का बैंक खाता हो और हर गांव में बिजली हो। वर्ष 2014 से पहले भ्रष्टाचार के अनेक मामले सामने आ रहे थे और 12 लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए थे।'

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के अथक परिश्रम से पिछले चार वर्षों में 29 लाख लोगों के बैंक खाते खुले और साढ़े सात लाख शौचालय बनाये गये। नौ लाख परिवारों को रसोई गैस सिलेंडर दिये गये। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कोई सरकार देश के सभी युवाओं को रोजगार प्रदान नहीं कर सकती। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के वादे को लेकर केंद्र सरकार की प्राय: आलोचना होती रहती है।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्व रोजगार के नये रास्ते खोले हैं और बिना किसी जमानत या जमानतदार के युवा रोजगार के लिए 10 हजार से 10 लाख रुपये तक के कर्ज ले सकते हैं। इस योजना से बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित हुए हैं।

नेशनल डेस्क: उन्नाव रेप और कठुआ गैंगरेप की घटनाओं को लेकर विरोध सह रही केंद्र सरकार कड़े कानून बनाने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में केंद्र ने कहा कि पोक्सो एक्ट में संसोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 12 साल तक के बच्चों के साथ रेप करने के दोषी को फांसी की सजा दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है। केंद्र ने एक जनहित याचिका के जवाब में यह रिपोर्ट सौंपी। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। 

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपार्ट
केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया कि 12 साल के बच्चों से रेप के मामले में POCSO ऐक्ट में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे दोषियों को अधिकतम दंड के तौर पर मौत की सजा दी जा सके। हाल ही में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा था कि उनका मंत्रालय बच्चों के साथ दुष्कर्म के दोषियों के लिए मृत्युदंड की सजा के प्रावधान के लिए पॉक्सो एक्ट में संशोधन की मांग पर विचार कर रहा है। 

बता दें कि बच्चियों के साथ बढ़ रही रेप की घटनाओं को लेकर देशभर से पाक्सो एक्ट में संशोधन की मांग उठने लगी है। जम्मू के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के बाद लोग रोष में हैं। पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले का शर्मनाक बताया ​था। 

क्या मोदी सरकार प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी की बहु-प्रचलित नीति को खटाई में डालने की योजना बना रही है? अगर कोयला सचिव सुशील कुमार और नीति आयोग के वाइस चांसलर राजीव कुमार के बयान कोई संकेत हैं तो नीलामी नीति अतीत की बात हो सकती है। सुशील कुमार का कहना है कि कोई भी व्यक्ति कर वसूली राजस्व के रूप में हमेशा नहीं सोच सकता और उसके दिल में व्यापक लक्ष्य होते हैं। नीति आयोग के वाइस चेयरमैन ने भी एक बंद कमरे की कांफ्रैंस में इसी तरह की भावनाएं व्यक्त की हैं।

औद्योगिक नेताओं के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार स्पैक्ट्रम नीलामी के अपने नजरिए पर फिर से विचार कर रही है। यह प्रक्रिया की शुरूआत है। यहां आप सरकार के अधिकतम राजस्व की बात नहीं कर सकते। आप अपने नागरिकों को अधिक लाभ पहुंचाने के लिए अधिकतम विकास चाहते हैं या फिर प्राइवेट सैक्टर को लाभ पहुंचाना।
उन्होंने आगे कहा कि हमने वित्तीय वर्ष के दौरान प्रसिद्ध स्पैक्ट्रम की बिक्री नहीं की और सरकार इस पर फिर से विचार कर रही है। राजस्व बढ़ाने की बजाय सरकार अधिक विकास करना चाहती है ताकि लोगों को अधिक लाभ पहुंच सके। ये बयान हैरान करने वाले हैं क्योंकि यू.पी.ए.-1 की कोयला और स्पैक्ट्रम की नीतियों ने मनमोहन सिंह सरकार का पतन करवाया था जिसके तहत ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर स्पैक्ट्रम और कोयला खानों की अलॉटमैंट की गई थी। कैग ने तब सरकार पर राष्ट्रीय खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुक्सान पहुंचाने का आरोप लगाया था क्योंकि स्पैक्ट्रम की नीलामी नहीं की गई थी।
इसी तरह के आरोप पिछली सरकार द्वारा कोयला खानों के आबंटन के संबंध में लगाए गए थे जिसे कोयला स्कैंडल बताया गया था। इस कलाबाजी से यह संकेत मिलता है कि मोदी सरकार में भाषणबाजी की जगह वास्तविकता ले रही है। प्राइवेट सैक्टर नुक्सान के खिलाफ रोष व्यक्त कर रहे हैं और वे अपना विस्तार करने में विफल रहे हैं इसलिए वे भारी ऋणों की वापसी करने में अक्षम हैं जो उन्होंने बैंक से लिए थे जिसके परिणामस्वरूप बैंकों की गैर-निष्पादित पूंजी (एन.पी.ए.) बढ़ गई और बैंक दिवालिएपन के कगार पर पहुंच गए।

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