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दुनिया

दुनिया (36)

जकार्ता। इंडोनेशिया के पश्चिमी प्रांत एसे में अाज एक तेल के अवैध कुंए में अाग लग गई हैं, जिस कारण 10 लाेगाें की मौत हाे गई हैं अौर कई झुलस गए हैं। इंडोनेशिया के आपदा प्रबंधन विभाग ने एक वक्तव्य जारी कर इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि अाग लगने के कारण घटनास्थल पर पाइप वैल्डिंग के काम हाे सकता हैं। 

अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय समय के अनुसार देर रात करीब 1ः30 मिनट पर यह भीषण आग लगी हैं। आज तड़के तक भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका था। आचे के रांतो पेरूलेक उपजिले के प्रमुख सैफुल ने कहा कि आग अभी भी भीषण रूप से लगी है और इस पर काबू नहीं पाया जा सका है। यह पहला मौका नहीं हैं, जब एेसा हुअा हाे इससे पहले भी तेल के कुंए में अवैध खुदाई के कारण 5 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। 

नाइजीरिया। सांप्रदायिक हिंसा का सामना कर रहे नाइजीरिया के एक केंद्रीय प्रांत में बंदूकों से लैस कुछ चरवाहों ने मंगलवार को एक चर्च की धार्मिक सभा पर हमला कर दिया जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई। 

बिन्यू प्रांत में पुलिस के प्रवक्ता मोसेस यामू ने बताया कि यह हमला ग्वेर ईस्ट प्रशासन के अयार बलोम नामक गांव में मंगलवार सुबह करीब छह बजे हुआ। श्री यामू ने चरवाहों द्वारा किये गए इस हमले में दो पादरियों समेत 18 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। 

अमरीका की जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के सर्जन्स ने दुनिया में पहली बार पूरे लिंग और अंडकोश का प्रत्यारोपण कर एक नई उपलब्धि को हासिल किया है। इस प्रत्यारोपण से अफगानिस्तान में घायल हुए यूएस सशस्त्र सेवाओं के एक सैनिक को नई जिंदगी मिली है। इस प्रक्रिया में पहली बार पूरे लिंग, एब्डोमिनल वॉल, स्क्रोटम को एक मृत व्यक्ति से सैनिक में ट्रांसप्लांट किया गया है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि यह मरीज जल्द अपने पैरों पर चलना शुरू कर देगा व इसी हफ्ते के अंदर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

14 घंटों तक लगातार चला ऑपरेशन
एनगैजेट की रिपोर्ट के मुताबिक इस ऑपरेशन में 9 प्लास्टिक सर्जन्स व 2 यूरोलॉजिकल सर्जन्स ने साथ मिल कर काम किया है और यह 14 घंटों तक लगातार चला। ऑपरेशन के बाद प्राप्तकर्ता ने कहा है कि अब वो काफी नार्मल अनुभव कर रहा है व उसे उम्मीद है कि वह जल्दी पूरी तरह से पहले की तरह ठीक हो जाएगा। 

इन कारणों के चलते किया गया प्रत्यारोपण 
दुश्मन का सामना कर रहे सैनिक को चोट लगने पर उसकी कीमती जान को बचाने का पूरा प्रयास किया जाता है लेकिन लिंग या इसके आस पास चोट लगने से उसे बचाना असंभव सा लगने लगता है जिस वजह से सर्जन्स ने इस प्रत्यारोपण को काफी अहम बताया है। 

मरीज़ को इन्फैक्शन से बचने के लिए लिया गया अहम फैसला
इस प्रत्यारोपण में मरीज की स्किन, मसल, टैंडोन्स, नर्वस बोन्स और यहां तक की ब्लड वैसल्स को भी बदला गया है। हैरानी की बात तो यह है कि इस दौरान जो टिश्यूज़ का इस्तेमाल किया गया है वह भी मरीज के शरीर से ही निकाले गए ताकि रोगी को इन्फैक्शन होने से बचाया जा सके।

पहली बार इतने बड़े एरिए का किया गया ट्रांसप्लांट
जॉन्स हॉपकिंस जीनिटोरिनरी ट्रांसपलांट प्रोग्राम के क्लीनिकल डायरैक्टर रिचर्ड पैडिट (Richard Redett) ने द वर्ज को बताया है कि यह पहली बार हुआ है कि डॉक्टर्स ने मानवीय शरीर के इतने बड़े एरिए को ट्रासप्लांट किया है। इसमें लोअर अबडोमन, पूरा लिंग और अंडकोश की थैली को मृत रोगी से निकाल कर बदला गया है। डॉक्टर फिलहाल मरीज़ द्वारा मूत्र की प्रक्रिया सहीं तरीके से काम कर रही है इसका पता लगा रहे हैं। लेकिन उनका कहना है कि सैंसेशन को पुन प्राप्त करने में रोगी को 6 महीनों का समय लग सकता है। 

विस्फोटक उपकरण की चपेट में आने से घायल हुआ था सैनिक
न्यू यॉक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जिस रोगी का प्रत्यारोपण किया गया है वह अफगानिस्तान में विस्फोटक उपकरण की चपेट में आने से घायल हुआ था। उसकी टांगे, लिंग, अंडकोश की थैली और लोयर अबडोमन ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया था। जिस वजह से इस 24 वर्षिय रोगी का प्रत्यारोपण किया गया है। 

बीजिंग। परमाणु परीक्षणों को लेकर चल रही अमरीका- उत्तर कोरिया की जुबानी जंग के बाद अब पूरी दुनिया की नजर 26 अप्रैल को वर्षों बाद कोरियाई प्रायद्वीप के दोनों देशों के बीच होने वाले पहले शिखर सम्‍मेलन में उत्तर कोरिया के  किम जोंग उन व दक्षिण कोरिया  के राष्‍ट्रपति मून की मुलाकात व मई में किम की अमरीकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से होने वाली वार्ता पर है। लेकिन इन दोनों बैठकों पर अगर सबसे ज्‍यादा दिलचस्‍पी व शातिर नजर यदि किसी देश की है तो वो चीन है क्‍योंकि इस मुद्दे के हल से सबसे ज्यादा फायदा चीन को ही होने वाला है।

 जानकारी के अनुसार चीन की शातिर नजर अब उत्तर कोरिया पर इसलिए है क्योंकि उत्तर कोरिया का 90 फीसद कारोबार चीन से होता है। चीन ही उसको कई जरूरी चीजों की आपूर्ति करता है चाहे वो तेल हो या फिर कोयला या अन्‍य दूसरी चीजें। इस लिहाज से उत्तर कोरिया में दिन के साथ शुरू होने वाली दिनचर्या का चीन एक अहम हिस्‍सा है।स्‍पेशल इकनॉमिक जोन बनाने की बात कर चीन ने कहीं न कहीं उत्तर को‍रिया को लेकर अपनी भावी रणनीति भी साफ कर दी है। यूं भी स्‍पेशल इकनॉमिक जोन बनाकर वह उत्तर कोरिया में वही दांव खेलना चाहता है जो अब तक दूसरे देशों में खेलता आया है। यहां पर एक चीज और ध्‍यान में रखनी जरूरी  है कि अभी तक चीन भारत के पड़ोसी देशों को अपनी कर और आर्थिक ढांचे में सुधार करने की बात कर अपनी गिरफ्त में ले रहा था, लेकिन अब उत्तर कोरिया भी कहीं न कहीं उसकी निगाह में आ गया है।

पिछले दिनों जब उत्तर कोरिया को लेकर तनाव चरम पर था और संयुक्‍त राष्‍ट्र ने उसके खिलाफ प्रतिबंध और कड़े कर दिए थे उस वक्‍त भी चीन ने गलत तरीके से ही सही लेकिन कोयला समेत दूसरी चीजों की आपूर्ति उसको की थी। इसका खुलासा पहले जापान ने किया था बाद में अमरीका ने भी इस तरह का बयान दिया था कि यूएन के लगाए प्रतिबंधों के बावजूद चीन उसकी मदद कर रहा है।  मौजूदा समय में उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया और अमरीका से वार्ता के लिए राजी हो चुका है। ऐसे में चीन की दिलचस्‍पी इसमें बढ़ गई है।

इसकी कुछ वजह काफी अहम है। चीन के सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने इसको लेकर कुछ बातें कहीं हैं। अखबार ने जहां उत्तर कोरिया के बदले नजरिए का पूरी दुनिया से स्‍वागत करने की अपील की है, वहीं उसने कहा है कि यदि इस मुद्दे का हल निकल गया और कोई समझौता हो सका, तो यह कोरियाई प्रायद्वीप समेत चीन के लिए भी काफी फायदेमंद होगा।  बता दें कि उत्तर कोरिया में मौजूद परमाणु रिएक्‍टरों को लगाने में भी चीन का योगदान रहा है। उत्तर कोरिया में इसको करने में दूसरा साझेदार रूस बना था। हालांकि यह काम कहीं न कहीं अवैध रूप से किया गया था। अवैध इसलिए क्‍योंकि उस वक्‍त भी उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगे हुए थे। लिहाजा यहां पर परमाणु रिएक्‍टर लगाने, इसकी तकनीक और इसको लेकर वहां के लोगों को शिक्षित करने का काम भी इन्‍हीं दोनों के सहयोग से किया गया था।

वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप सरकार एच-1 बी वीजाधारकों के जीवनसाथियों के लिए कार्य परमिट को समाप्त करने की योजना बना रही है। यानी कि यदि पति के पास एच-1 बी वीजा है, तो पत्नी को भी कार्य करने की अनुमति नहीं होगी। इसी तरह पत्नी के पास वीजा होने पर पति को कार्य परमिट नहीं मिलेगा। संघीय एजेंसी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। माना जा रहा है कि इस कदम से हजारों भारतीयों पर असर पड़ेगा।

ओबामा सरकार ने लागू किया था नियम
बराक ओबामा कार्यकाल के जीवनसाथी को कार्य परमिट देने के इस फैसले को खत्म करने से 70,000 से अधिक एच-4 वीजाधारक प्रभावित होंगे जिनके पास कार्य परमिट है। एच-4 वीजा एच-1 बी वीजाधारक के जीवनसाथी को जारी किया जाता है। इनमें से बड़ी संख्या में भारतीय कुशल पेशेवर हैं। उन्हें यह वर्क या कार्य परमिट ओबामा प्रशासन के कार्यकाल में जारी विशेष आदेश के जरिए मिला था। इस प्रावधान का सबसे अधिक फायदा भारतीय-अमेरिकियों को मिला था। एक लाख से अधिक एच-4 वीजा धारकों को इस नियम का लाभ मिल चुका है।

गर्मियों में आदेश जारी कर सकती है ट्रंप सरकार
ओबामा प्रशासन के 2015 के नियम के अनुसार एच-1 बी वीजा धारकों के जीवनसाथियों को कार्य परमिट की अनुमति दी थी, अन्यथा वे कोई नौकरी नहीं कर सकते। वहीं इसका दूसरा रास्ता यह है कि एच-1 बी वीजाधारक स्थानीय निवासी का दर्जा हासिल करें। इस प्रक्रिया में एक दशक या अधिक का समय लगता है। ऐसे में ओबामा प्रशासन के इस नियम से उन एच-1 बी वीजाधारकों को फायदा हुआ था, जिनके जीवनसाथी भी अमेरिका में नौकरी करना चाहते हैं। ट्रंप प्रशासन इस प्रावधान को समाप्त करने की योजना बना रहा है। इन गर्मियों में इस बारे में औपचारिक घोषणा हो सकती है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) के निदेशक फ्रांसिस सिसना ने सीनेटर चक ग्रासले को पत्र लिखकर यह जानकारी दी है।  

बीजिंग। दक्षिणी चीन के एक कराओके लाउंज में आग लगने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और अन्य 5 लोग घायल हो गए। आशंका है कि किसी ने जानबूझ कर आग लगाई है। पुलिस के अनुसार गुआंगदोंग प्रांत के किनग्यूआन शहर में तीन मंजिला इमारत में आग आधी रात के बाद लगी। स्थानीय समयानुसार देर रात एक बजे से पहले उस पर काबू पा लिया गया था।

किनग्यूआन जन सुरक्षा विभाग ने सोशल मीडिया साइट  पर बताया कि प्राथमिक जांच के अनुसार आग वहां लगाई गई थी। उसने कहा कि जन सुरक्षा अधिकारियों ने अपनी जांच तेज कर रहा है। पुलिस ने अपने बयान में आग लगने के स्थल की जानकारी नहीं दी लेकिन सरकारी समाचार एजैंसी ‘शिन्हुआ’ ने बताया कि आग केटीवी हाउस या कराओके लाउंज में लगी।

बीजिंग। शंघाई कॉपरेशन ऑर्गानाइजेशन ( एससीओ ) के रक्षा तथा विदेश मंत्रियों की बैठक सुषमा स्वराज ने कहा कि आतंकवाद जीवन , शांति और समृद्धि जैसे मूल मानवाधिकारों का दुश्मन है। उन्होंने कहा कि संरक्षणवाद के सभी रूपों को खारिज किया जाना चाहिए। बता दें कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी इस बैठक में हिस्सा ले रही हैं। एससीओ की रक्षा और विदेश मंत्रियों की बैठक एक ही वक्त में हो रही है। रक्षा मंत्रियों और विदेश मंत्रियों की बैठक जून में किंगदाओं शहर में होने वाली एससीओ शिखर सम्मेलन की तैयारियों के तहत हो रही हैं। जून में होने वाले शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग ले सकते हैं।

भारत-पाकिस्तान पिछले ही साल इसके सदस्य बने हैं और उसके बाद शीर्ष- मंत्री स्तर की यह पहली बैठकें है। आज हो रही बैठकों में क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद सहित अनेक मुद्दों पर चर्चा होने की और एससीओ शिखर सम्मेलन का एजेंड़ा तय होने की उम्मीद है। एससीओ की स्थापना 2001 में हुई थी जिसमें चीन, रूस, कजाखिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजीकिस्तान, किर्गिस्तान, भारत और पाकिस्तान सदस्य हैं। इस संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाना, खुफिया जानकारी साझा करना, मध्य एशिया में आंतकवाद विरोधी अभियान चलाना तथा साइबर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो कर काम करना है।

नाथू ला मार्ग से एक बार फिर कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से बतााया गया कि भारत और चीन ने सिक्किम में नाथू ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने पर सहमित जता दी है। लगभग 10 महीने पहले डोकलाम में पैदा हुए गतिरोध के बाद यह यात्रा रोक दी गई थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि चीन विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत के दौरान यह सहमति बनी है।

मानसरोवर यात्रा पर बनी सहमति
सुषमा ने वांग के साथ संयुक्त वार्ता में कहा, हम इस बात से खुश हैं कि इस साल नाथू ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होगी। उन्होंने कहा मुझे विश्वास है कि इस साल चीनी पक्ष पूरे सहयोग से यात्रा भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए सुखद अनुभव अनुभव होगी।

ANI
 
@ANI
 

China has confirmed data sharing on Sutlej and Brahmaputra rivers in 2018. As it directly affects lives of people living there we welcome this. Also Kailash Mansarovar Yatra will resume this year through Nathu La pass: EAM Sushma Swaraj in Beijing

 
 विदेश मंत्रालय हर साल दो अलग-अलग मार्गों से जून से सितंबर तक यात्रा का आयोजन करता है. यह दो मार्ग लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) हैं

बीजिंग। चीन ने भारत के साथ ब्रह्मपुत्र और सतलज नदी में जल प्रवाह से संबंधित ( हाइड्रोलॉजिकल ) आंकड़ों को साझा करने की व्यवस्था फिर शुरू करने पर सहमति जताई है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को इसकी जानकारी दी। दोनों देशों के सैनिकों के बीच डोकलाम क्षेत्र में तनातनी के बाद से चीन ने इन नदियों के प्रवाह की स्थित की सूचनाएं भारत के साथ साझाकरने का सिलसिला बंद कर दिया था जबकि ये आंकड़े बाढ़ आदि का पूर्वानुमान लगाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। 

Global News Views@GNewsViews
 

China has agreed to resume sharing of hydrological data of the Brahmaputra and Sutlej rivers, External Affairs Minister Sushma Swaraj said in Beijing on Sunday, months after... http://global-news-views.news/china-agrees-to-share-data-on-brahmaputra-mansarovar-yatra-via-nathu-la/ 

China Agrees to Share Data on Brahmaputra, Mansarovar Yatra via Nathu La | Global News Views

China has agreed to resume sharing of hydrological data of the Brahmaputra and Sutlej rivers, External Affairs Minister Sushma Swaraj said in Beijing on Sunday, months after Beijing stopped the...

global-news-views.news
 
शंघाई सहयोग संगठन ( एससीओ ) की विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए सुषमा स्वराज कल यहां चार दिवसीय यात्रा पर पहुंचीं। स्वराज ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की। दोनों के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों तथा संबंधों को सुधारने के लिए उच्च - स्तरीय वार्ता बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। स्वराज ने वांग के साथ संयुक्त मीडिया कार्यक्रम में कहा कि मैं 2018 में ब्रह्मपुत्र और सतलज नदी से जुड़े आंकड़े फिर से साझा करने के चीन के कदम की प्रशंसा करती हूं क्योंकि यह मुद्दा सीधे इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों से जुड़ा है। 


पिछले महीने, भारत के जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर अपने चीनी समकक्षों से बात की थी। मौजूदा द्विपक्षीय समझौता व्यवस्था के तहत , चीन बाढ़ के मौसम के दौरान भारत को ब्रह्मपुत्र नदी और सतलज नदी की जल प्रवाह संबंधी जानकारी प्रदान करता है।

काबुल। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल  में रविवार को एक आत्मघाती बम हमले में कम से कम 57 लोगों की मौत हो गई और 100 लोग घायल हो गए । आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि  दश्त-ए-बरची क्षेत्र के एक मतदाता नामांकन केंद्र   के बाहर इकट्ठे लोगों के बीच एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया। अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस आत्मघाती बम हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। धमाके के बाद से यहां 20 अक्टूबर को होने वाले चुनावों की सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है।

काबुल के पुलिस प्रमुख अब्दुल रहमान राहिमी ने बताया कि धमाका किसी आत्मघाती हमले का परिणाम है जिससे लोगों की मौत हुई है। इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिली है। टोलो न्यूज के मुताबिक, काबुल पुलिस के प्रमुख दाऊद अमीन ने कहा, ‘धमाका केंद्र के एंट्री गेट पर हुआ।  स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि फिलहाल हादसे के शिकार लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। 

बता दें कि अफगानिस्तान में लंबे वक्त लंबित संसदीय चुनावों के लिए मतदाता नामांकन केंद्र स्थापित किए गए थे। इन मतदाता नामांकन केंद्रों को निशाना बनाए जाने का खतरा मंडरा रहा था।काबुल के दश्त-ए-बरची में हजारा अल्पसंख्यकों रहते हैं और आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) बार-बार यहां हमलों को अंजाम देता रहा है। 

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में रविवार को मतदाता और पहचान पत्र पंजीकरण केंद्र के बाहर इकट्ठे लोगों के बीच एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया। हमले में अब तक 31 लोग मारे जा चुके हैं और 50 लोग घायल हो गए हैं। धमाके के बाद से यहां 20 अक्टूबर को होने वाले चुनावों की सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है।

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